गीता आत्मसंतुष्टि और निष्काम कर्म का संदेश देती है, सफलता और संतुष्टि में अंतर : स्वामी प्रबुद्धानंद

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की पुण्यतिथि के अवसर पर महाविद्यालय के बाबूलाल गौर शोध समन्वय प्रकोष्ठ की ओर से ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। चिन्मय मिशन के स्वामी प्रबुद्धानंद जी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने गीता के जीवन-दर्शन, कर्मयोग, आत्मसंतुष्टि और भारतीय संस्कृति में उसके महत्व पर विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय जैन ने स्वामी प्रबुद्धानंद जी का शाल, श्रीफल और तुलसी पौधा भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बाबूलाल गौर प्रतिदिन गीता का स्वाध्याय करते थे। उनकी पुण्यतिथि पर गीता की शिक्षाओं को समझना विद्यार्थियों को जीवन की नई दिशा और ऊर्जा देगा।

मुख्य वक्ता स्वामी प्रबुद्धानंद जी ने कहा कि “गीता मनुष्य को आत्मसंतुष्टि और निष्काम कर्म का पाठ पढ़ाती है। सफलता और संतुष्टि में अंतर होता है। दूसरों को जानने से पहले हमें स्वयं को जानना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जीवन में प्राप्त फल को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना ही गीता का संदेश है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति और ऋषि-मुनियों की परंपरा में विश्वास रखते हुए गीता के अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हमें अपने शास्त्रों और ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। भारतीय गौरवशाली इतिहास और संस्कृति में विज्ञान एवं तकनीक के उपयोग के अनेक उदाहरण मिलते हैं। संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों और उपस्थित श्रोताओं की जिज्ञासाओं का भी स्वामी प्रबुद्धानंद ने समाधान किया।

कार्यक्रम में सभी अतिथियों, प्राचार्य, स्टाफ और विद्यार्थियों ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर राज्य अनुसूचित आयोग के सदस्य एवं पूर्व जनभागीदारी समिति अध्यक्ष बारे लाल अहिरवार, ब्रह्मचारिणी कात्यायनी चैतन्य आचार्य, टी.आर. मिश्रा, जनभागीदारी सदस्य तेजसिंह ठाकुर, संजय कुंवर, अंशुल यादव, दर्शन सेन, जोन परिषद नगर निगम भोपाल के अध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल, डॉ. पी.सी. दुबे, डॉ. जे.पी. शुक्ला, डॉ. कुलवंत कौर पांडे, इंजीनियर सलिल नायक सहित महाविद्यालय का शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संचालन क्षितिज द्विवेदी ने किया। संगोष्ठी संयोजक डॉ. अनुपमा यादव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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