उद्योगों की समस्याओं पर जल्द निर्णय की उम्मीद, FMPCCI प्रतिनिधिमंडल ने MPIDC MD से की मुलाकात

भोपाल, 12 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के उद्योगों से जुड़ी कई समस्याएं शासन स्तर पर विचाराधीन हैं और इन पर जल्द सकारात्मक निर्णय होने की संभावना है। यह जानकारी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला ने फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FMPCCI) के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दी।

FMPCCI अध्यक्ष हिमांशु खरे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को MPIDC के प्रबंध निदेशक से मुलाकात की। बैठक में MPIDC के कार्यकारी निदेशक विशाल चौहान भी मौजूद रहे। इस दौरान औद्योगिक विकास और उद्योगों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

उद्योगों को सरल और स्पष्ट नियमों की जरूरत

FMPCCI अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि प्रदेश का उद्योग और व्यापार जगत सरकार से किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं करता, बल्कि सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक नियम एवं प्रक्रियाएं चाहता है। नियमों के सरलीकरण से उद्यमी उत्पादन, निवेश, रोजगार, नवाचार और बाजार विस्तार पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।

उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी दौर में मध्यप्रदेश के उद्योगों को देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करनी है। इसके लिए प्रक्रियात्मक बाधाएं कम करना, अनुमतियां जल्द देना और बेहतर कारोबारी वातावरण जरूरी है।

संपत्ति कर के दोहरे भार का मुद्दा उठाया

प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर के दोहरे भार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। FMPCCI ने सुझाव दिया कि औद्योगिक क्षेत्रों में लिए जाने वाले संधारण शुल्क और नगर निकायों के संपत्ति कर के बीच उचित समन्वय किया जाए।

फेडरेशन के मुताबिक संधारण शुल्क का उपयोग पहले से ही औद्योगिक क्षेत्रों की सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं के रखरखाव में किया जाता है। ऐसे में इस व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है।

नक्शा मंजूरी के लिए सिंगल विंडो की मांग

औद्योगिक भवनों के नक्शे की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया। फेडरेशन ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में आवंटित जमीन पर निर्माण संबंधी अनुमतियां एक ही सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से पूरी की जानी चाहिए।

इसके साथ ही लोक सेवा गारंटी के तहत 30 दिन की समय-सीमा तय करने और निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने पर ऑनलाइन डिम्ड अप्रूवल की व्यवस्था का सुझाव दिया गया। इससे उद्योगों की स्थापना और विस्तार परियोजनाओं में देरी कम होने की उम्मीद है।

निवेश और रोजगार को मिलेगी गति

FMPCCI ने कहा कि प्रक्रियाओं के सरलीकरण और समयबद्ध अनुमतियों से नए निवेश, मौजूदा उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और MSME क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।

फेडरेशन ने कहा कि वह उद्योगों की समस्याओं को शासन के समक्ष लगातार उठाता रहेगा और नीतिगत सुधारों के लिए सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा।

प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष जयदेव ताम्रकार, सी.बी. मालपानी, अशोक आनंद, राजीव जैन, सचिव प्रवीण आचार्य, सहसचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह और मार्केटिंग हेड राजेश हिरवे शामिल रहे।

Exit mobile version