सात साल से लंबित कर्मचारी-पेंशनर चिकित्सा बीमा योजना लागू करने की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए प्रस्तावित चिकित्सा बीमा योजना को जल्द लागू करने की मांग उठी है। कर्मचारी नेता का कहना है कि यह योजना वर्ष 2019 से लंबित है, जबकि इसे लागू करने के लिए सरकार की ओर से पहले ही प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी।
कर्मचारी नेता के अनुसार, वर्ष 2019 में तत्कालीन वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन और स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल ने कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाकर योजना की जानकारी दी थी और सुझाव लिए थे। इसके बाद भी सात साल बीतने के बावजूद योजना लागू नहीं हो सकी है।
दावा किया गया है कि योजना लागू करने से सरकार पर सीधे अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों की पेंशन से बीमा प्रीमियम काटकर योजना संचालित की जा सकती है। बीमा कंपनी या निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से इलाज के दावों का भुगतान किया जा सकता है।
कर्मचारी नेता ने मध्यप्रदेश पुलिस में वर्ष 2013 से चल रही चिकित्सा बीमा योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को कम प्रीमियम पर चिकित्सा बीमा कवर दिया जा रहा है। इसी मॉडल को अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए भी अपनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 10 लाख कर्मचारी और लगभग इतने ही पेंशनर हैं। इतने बड़े समूह को योजना में शामिल करने से व्यापक स्तर पर चिकित्सा सुरक्षा उपलब्ध हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बार-बार होने वाली बैठकों और घोषणाओं के बजाय अब चिकित्सा बीमा योजना का आदेश जारी कर इसे जल्द लागू किया जाए।





