भोपाल में व्यापारियों को बड़ी राहत, नगर निगम ने कमर्शियल पंजीयन शुल्क खत्म किया

भोपाल। नगर निगम परिषद की बुधवार को हुई बैठक में शहर के व्यापारियों को बड़ी राहत मिली। परिषद ने कारोबारियों से वसूले जा रहे कमर्शियल पंजीयन


शुल्क को खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह शुल्क वर्ष 2022 में तत्कालीन निगम आयुक्त एवं प्रशासक केवीएस चौधरी कोलसानी के कार्यकाल में लागू किया गया था।
बैठक में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने शुल्क समाप्त करने की मांग उठाते हुए कहा कि भोपाल के अलावा अन्य शहरों में इस तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है। कांग्रेस पार्षदों ने भी मांग का समर्थन किया। चर्चा के बाद परिषद ने शुल्क खत्म करने पर सहमति जताई।
9 में से 8 प्रस्ताव मंजूर
परिषद की बैठक में कुल नौ प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से आठ को मंजूरी मिली। निगम की खाली पड़ी संपत्तियों और कार्यालयों को मासिक किराये पर देने के प्रस्ताव भी पारित किए गए। इनमें न्यू मार्केट स्थित जनसंपर्क कार्यालय, स्मार्ट सिटी कार्यालय के खाली हिस्से, मनीषा मार्केट-शाहपुरा के पास भवन अनुज्ञा कार्यालय, आईएसबीटी स्थित निगम कार्यालय और माता मंदिर स्थित हर्षवर्धन कॉम्प्लेक्स के खाली कार्यालय शामिल हैं।
जोन-7 के वार्ड-31 में नवीन मुख्यालय भवन के सर्विस ब्लॉक के आवंटन का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ। इसके अलावा पिछली परिषद बैठकों के कार्यवृत्त की पुष्टि और पार्षदों के सवालों के जवाब से जुड़े प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली।
कमिश्नर की खाली कुर्सी पर अध्यक्ष नाराज
प्रश्नकाल के दौरान निगम कमिश्नर संस्कृति जैन सदन में अपनी सीट पर मौजूद नहीं थीं। उनकी जानकारी लिए जाने के दौरान कुर्सी खाली मिलने पर पार्षदों ने आपत्ति जताई। परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने इस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को सदन की मर्यादा बनाए रखने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए।
टैक्स और मास्टर प्लान पर हंगामा
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने बजट में टैक्स नहीं बढ़ाने के दावे के बावजूद कई क्षेत्रों का परिक्षेत्र बदलने से करदाताओं पर बढ़े बोझ का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि परिक्षेत्र में बदलाव नियमित प्रक्रिया है तो इसकी जानकारी बजट में क्यों नहीं दी गई। महापौर मालती राय ने कहा कि परिक्षेत्र में बदलाव नियमानुसार किया गया है।
इसके बाद मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने अध्यक्ष की आसंदी के सामने पहुंचकर विरोध जताया।
भाजपा पार्षद ने भी अधिकारियों पर उठाए सवाल
संबल घोटाले को लेकर पार्षद गुड्डू चौहान ने कार्रवाई और अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त जांच का मुद्दा उठाया। एमआईसी सदस्य छाया ठाकुर ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार सवाल पूछने पर भी जवाब नहीं मिलता और आरटीआई लगाने की सलाह दी जाती है।
पार्षद नसीम गफूर ने सभी 85 वार्डों की पेयजल टंकियों की सफाई की जानकारी मांगी। उन्होंने गंदे पानी की शिकायतों का मुद्दा उठाया। जवाब में एमआईसी सदस्य रविंद्र यती ने डीबी मॉल के सामने स्थित पानी की टंकी की तस्वीरें दिखाकर टंकियों के साफ होने का दावा किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सदन में जर्जर सड़कों, जलभराव और सफाई व्यवस्था को लेकर भी पार्षदों ने सवाल किए।
बाग मुगालिया प्रोजेक्ट के भुगतान पर सवाल
हाउसिंग फॉर ऑल के बाग मुगालिया प्रोजेक्ट में अधूरे काम का मुद्दा भी परिषद में उठा। बताया गया कि पुरानी ठेका कंपनी ने 2019 से 2024 तक काम नहीं किया, जिसके बाद उसका ठेका समाप्त कर दिया गया। हितग्राहियों की परेशानी को देखते हुए 12 नंबर क्षेत्र में दो ब्लॉक का काम दूसरे ठेकेदार को दिया गया।
शबिस्ता जकी ने सवाल किया कि काम बाग मुगालिया में हो रहा है तो भुगतान 12 नंबर क्षेत्र के प्रोजेक्ट से क्यों किया जा रहा है। अधिकारियों-कर्मचारियों को उपलब्ध कराई गई गाड़ियों और फर्नीचर-स्टेशनरी की खरीद को लेकर भी सवाल उठाए गए।
शुल्क हटाने की मांग को लेकर व्यापारियों का प्रदर्शन
कमर्शियल लाइसेंस शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने बुधवार को आईएसबीटी स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन और धरना दिया। व्यापारियों ने कहा कि प्रदेश के अन्य शहरों में ऐसा शुल्क नहीं लिया जा रहा है, इसलिए भोपाल के व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
व्यापारियों ने महापौर मालती राय, निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी और नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी से मुलाकात कर शुल्क खत्म करने की मांग रखी। परिषद की बैठक में भी पार्षदों ने व्यापारियों की मांग का समर्थन किया। चर्चा के बाद शुल्क समाप्त करने का फैसला व्यापारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।





