एम्स भोपाल के प्रोफेसर अश्विन कोटनिस ने कैंसर और एआई पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक का सह-लेखन किया

भोपाल। कैंसर की समय पर पहचान और बेहतर उपचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर एम्स भोपाल के जैवरसायन विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) अश्विन कोटनिस ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ एक अकादमिक पुस्तक का सह-लेखन किया है। ‘कैंसर विज्ञान में बेहतर निदान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ नामक यह पुस्तक एल्सेवियर प्रकाशन ने प्रकाशित की है।
पुस्तक में बताया गया है कि एआई कैंसर की शुरुआती पहचान, जांच, उपचार, नई दवाओं की खोज और मरीजों की देखभाल में चिकित्सकों की किस तरह मदद कर सकता है। इसमें मशीन लर्निंग और प्राकृतिक भाषा संसाधन जैसी तकनीकों के चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग को भी समझाया गया है।
डॉक्टरों की मदद करेगी एआई तकनीक
पुस्तक में बताया गया है कि एआई का उद्देश्य डॉक्टरों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर निर्णय लेने में सहायता देना है। यह बड़ी मात्रा में चिकित्सा संबंधी जानकारी का तेजी से विश्लेषण कर बीमारी से जुड़े महत्वपूर्ण पैटर्न पहचानने में मदद कर सकती है। इससे चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को कैंसर को बेहतर ढंग से समझने और उपचार की दिशा तय करने में सहायता मिल सकती है।
पुस्तक में मरीजों की स्वास्थ्य शिक्षा और उपचार में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच मरीजों को अपनी बीमारी, जांच और उपचार से जुड़ी सही जानकारी समझना जरूरी है। इससे वे डॉक्टरों के साथ बेहतर संवाद कर सकेंगे और अपने स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
65 विशेषज्ञों ने दिया योगदान
पुस्तक में कुल 16 अध्याय हैं और अमेरिका, मध्य पूर्व तथा भारत के 65 लेखकों ने इसमें योगदान दिया है। इसका सह-लेखन एम्स भोपाल के प्रोफेसर (डॉ.) अश्विन कोटनिस, शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉ. गोहर राशिद, एरा यूनिवर्सिटी लखनऊ की डॉ. ज़ैनब सिद्दीकी और नेशनल रिसर्च सेंटर, काहिरा (मिस्र) के डॉ. वेल हाफ़ेज़ ने किया है।
पुस्तक में कैंसर की शुरुआती जांच और पहचान से लेकर उपचार, नई दवाओं की खोज और मरीजों की देखभाल तक एआई के विभिन्न उपयोगों को शामिल किया गया है। यह शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में काम करेगी।





