AIIMS Bhopal News: एम्स भोपाल ने ORS सप्ताह पर चलाया जागरूकता अभियान, दस्त से बचाव के लिए दिए जरूरी सुझाव

बच्चों में डायरिया और निर्जलीकरण रोकने के लिए ORS और जिंक के उपयोग पर दिया गया विशेष जोर

भोपाल। एम्स भोपाल ने बच्चों में डायरिया (दस्त) और निर्जलीकरण से होने वाली गंभीर समस्याओं की रोकथाम के लिए 24 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक ओआरएस (ORS) सप्ताह के अंतर्गत विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य लोगों को ORS, जिंक, स्वच्छता और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जागरूक करना था।

एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग की टीम ने स्मार्ट यूनिट, पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों तथा ओपीडी में आए मरीजों और उनके परिवारों को दस्त से बचाव और सही उपचार की जानकारी दी। इस दौरान ORS घोल तैयार करने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।

डायरिया होने पर तुरंत ORS देना शुरू करें

बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिखा मलिक ने बताया कि ORS केवल एक दवा नहीं, बल्कि जीवनरक्षक घोल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे को 24 घंटे के भीतर तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त हों, तो उसे डायरिया माना जाना चाहिए और बिना देरी किए ORS देना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि ORS शरीर में पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है, जिससे निर्जलीकरण का खतरा कम होता है और गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव होता है।

जिंक, स्वच्छता और सुरक्षित पानी का महत्व बताया

अभियान के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जिंक की पूरी खुराक लेने, हाथों की नियमित सफाई, सुरक्षित पेयजल के उपयोग और बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ व भोजन देते रहने की सलाह दी। साथ ही अभिभावकों से कहा गया कि निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें।

डायरिया से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है

एम्स भोपाल के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में लगभग 9 प्रतिशत मौतें डायरिया के कारण होती हैं। समय पर ORS और जिंक का उपयोग कर इनमें से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।

एम्स भोपाल ने लोगों से अपील की है कि दस्त होने पर घबराने के बजाय तुरंत ORS देना शुरू करें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार जिंक की पूरी खुराक दें और समय पर उपचार कराएं। इससे बच्चों को निर्जलीकरण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।

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