
वाशिंगटन/आइडाहो। क्या आप यकीन करेंगे कि कभी एक चार साल की बच्ची को बाकायदा डाक टिकट लगाकर अमेरिकी डाक सेवा (US Postal Service) के माध्यम से “मेल” किया गया था? साल 1914 में चार्लोट मे पिएर्सटॉर्फ (Charlotte May Pierstorff) नाम की इस बच्ची ने इतिहास के सबसे अजीब और अनोखे सफर में से एक किया — ट्रेन के डाक डिब्बे में पार्सल की तरह।
क्यों हुई यह अनोखी ‘डिलीवरी’?
चार्लोट आइडाहो (Idaho) में अपने माता-पिता के साथ रहती थीं। वे चाहते थे कि वह कुछ मील दूर अपनी दादी से मिलने जाएं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ट्रेन टिकट खरीदने की इजाजत नहीं देती थी। तभी उन्हें नव-शुरू हुई पार्सल पोस्ट सेवा का ख्याल आया।
पार्सल की तरह भेजने की तरकीब
चार्लोट का वजन सिर्फ 22 किलो था, जबकि उस समय अमेरिकी डाक विभाग की पार्सल सीमा 22.5 किलो थी। इसका फायदा उठाकर माता-पिता ने चार्लोट की कोट पर 32 सेंट का डाक टिकट चिपकाया, एक पता टैग उनकी दादी के नाम लिखा, और उन्हें स्थानीय डाकघर में एक पार्सल की तरह “सौंप” दिया गया।
सुरक्षित निगरानी में यात्रा
चार्लोट को किसी बोरे में नहीं रखा गया, बल्कि वह ट्रेन के डाक विभाग के डिब्बे में एक डाक कर्मचारी की निगरानी में बैठीं। वह कर्मचारी उन्हें सीधे उनकी दादी के पते पर लेकर गया, और उन्होंने बच्ची को ठीक उसी तरह स्वीकार किया जैसे कोई खास डिलीवरी हो — बस यह डिलीवरी थोड़ी ज्यादा नटखट और मासूम थी।
तब कानून चुप था
अचरज की बात यह है कि उस समय तक डाक सेवा के नियमों में यह स्पष्ट नहीं था कि इंसानों को मेल करना अवैध है। इसलिए यह प्रक्रिया कानून के दायरे में technically मानी जा सकती थी। हालांकि इस घटना और कुछ अन्य ऐसे मामलों के बाद अमेरिकी डाक सेवा ने नीतियों में बदलाव कर दिए और इंसानों को डाक के माध्यम से भेजना कड़ाई से प्रतिबंधित कर दिया गया।
इतिहास में अनोखा स्थान
आज चार्लोट मे पिएर्सटॉर्फ को “मेल की गई बच्ची” (The Mailed Child) के रूप में जाना जाता है। उन पर किताबें लिखी गई हैं और यह घटना अमेरिका में डाक सेवा के इतिहास में एक मज़ेदार किंतु अद्भुत किस्सा बन चुकी है।





