लो भाई, मिलिए नई पीढ़ी के ‘जेन बीटा’ से! उम्र महज तीन साल, लेकिन शिकायत ऐसी कि सीधे पुलिस स्टेशन पहुंच गए। मामला कोई चोरी, मारपीट या पड़ोसी विवाद का नहीं था। असली मुद्दा था—चॉकलेट!
बच्चे की शिकायत थी कि उसकी मां ने ज्यादा चॉकलेट खाने से रोकने के लिए उसकी चॉकलेट अपने कब्जे में ले ली। अब तीन साल के साहब को यह अन्याय इतना बड़ा लगा कि उन्होंने घर की समस्या का समाधान घर में खोजने के बजाय सीधे थाने का रास्ता पकड़ लिया।
थाने पहुंचने पर पुलिसकर्मी ने भी बच्चे की शिकायत को पूरी गंभीरता से सुना। बाकायदा कागज पर शिकायत लिखी गई, ताकि नन्हे फरियादी को लगे कि उसकी शिकायत दर्ज हो गई है और अब कानून जरूर उसकी चॉकलेट वापस दिलाएगा।
अब जरा सोचिए, जिस उम्र में बच्चे खिलौनों के लिए रोते हैं, ये जनाब न्याय व्यवस्था का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
वैसे मां भी सोच रही होंगी—“बेटा चॉकलेट मैंने छीनी थी, लेकिन तुमने तो मुझे थाने पहुंचा दिया!”
इस पूरे मामले ने यह भी बता दिया कि नई पीढ़ी को अपने अधिकारों की जानकारी बहुत जल्दी हो रही है। बस अब देखना यह है कि अगली शिकायत चॉकलेट की होगी या मोबाइल का स्क्रीन टाइम कम करने पर!
