ओबीसी महासभा ने ज्ञापन सौंपकर नए अध्यादेश की मांग की, 28 अक्टूबर को संभाग स्तर पर होगा प्रदर्शन; शिवपुरी विधायक से पदाधिकारियों की तीखी बहस
भोपाल, 15 अक्टूबर। मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की बहाली की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने बुधवार को प्रदेश के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सरकार से आरक्षण के मुद्दे पर ठोस कानूनी कदम उठाने की मांग की। संगठन ने 13 प्रतिशत होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत दिलाने और आरक्षण के लिए नया अध्यादेश लाने की मांग भी उठाई। ओबीसी महासभा के अनुसार, आंदोलन के पहले चरण में प्रदेशभर में प्रदर्शन किए गए। संगठन ने मांग की कि सरकार ओबीसी वर्ग की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराकर पर्याप्त और विश्वसनीय आंकड़े जुटाए। इसके लिए विशेषज्ञ समिति या आयोग गठित किया जाए और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर 27 प्रतिशत आरक्षण को मजबूत आधार देने के लिए अध्यादेश लाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी की मांग
महासभा ने ज्ञापन में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करने, 13 प्रतिशत होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दिलाने और लंबित बैकलॉग पदों को भरने की मांग की। संगठन का कहना है कि आरक्षण के मुद्दे पर वर्षों से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को जल्द कदम उठाने चाहिए।
28 अक्टूबर को संभाग स्तर पर प्रदर्शन
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने बताया कि आंदोलन के दूसरे चरण में 28 अक्टूबर को प्रदेश के सभी संभागों में धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद नवंबर में भोपाल में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। इसकी तारीख जल्द घोषित करने की बात कही गई है। गुर्जर ने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा है। संगठन की मांग है कि सरकार कानूनी कमियों को दूर कर आरक्षण की बहाली के लिए ठोस कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
शिवपुरी में विधायक से तीखी बहस
इधर, शिवपुरी में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर महासभा के पदाधिकारियों और विधायक देवेंद्र जैन के बीच तीखी बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, बातचीत के दौरान विधायक ने कथित तौर पर कहा, “मैं गधा हूं।” इस पर वहां मौजूद महासभा के पदाधिकारियों ने जवाब में कहा, “हां, आप गधे हो।” इस दौरान माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
