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21 साल का इंतजार, अब अगले 21 साल के भविष्य पर नजर

क्रेडाई ने मास्टर प्लान-2047 पर 51 आपत्ति-सुझाव सौंपे, नियमों में एकरूपता और जरूरी सुधारों के बाद अंतिम प्रकाशन की मांग

भोपाल। राजधानी के नए मास्टर प्लान का 21 साल से इंतजार कर रहे क्रेडाई ने अब विकास योजना-2047 को अंतिम रूप देने की मांग उठाई है। क्रेडाई भोपाल ने शनिवार को नगर तथा ग्राम निवेश के जिला कार्यालय में मास्टर प्लान के प्रारूप पर 51 आपत्ति-सुझाव सौंपे। वहीं, क्रेडाई मध्यप्रदेश की ओर से भवन निर्माण और विकास संबंधी नियमों पर आठ सुझाव भी दिए गए। संस्था का कहना है कि जरूरी सुधारों और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद योजना का अंतिम प्रकाशन किया जाना चाहिए, ताकि शहर के विकास को स्पष्ट दिशा मिल सके।

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक और कोषाध्यक्ष संजीव ठाकुर ने एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों के साथ तैयार किए गए सुझाव विभाग को सौंपे। मीक ने कहा कि भोपाल ने नई विकास योजना के लिए 21 साल इंतजार किया है। अब यह योजना अगले 21 साल के भविष्य को तय करेगी। इसलिए जरूरी है कि लोगों की आपत्तियों को सुना जाए और आवश्यक सुधारों के बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाए।

पुराने और नए प्रारूप में तालमेल पर जोर

क्रेडाई ने सुझावों में पुराने स्वीकृत लेआउट, पहले से मिली अनुमतियों और प्रस्तावित सड़कों के बीच तालमेल बनाने की जरूरत बताई है। संस्था के अनुसार, लंबे समय तक मास्टर प्लान लंबित रहने और प्रस्तावों में बदलाव से निवेशकों और निर्माण परियोजनाओं के सामने अनिश्चितता पैदा होती है। स्पष्ट नियमों से विकास कार्यों को गति मिल सकती है।

रिंग रोड और गांवों की कनेक्टिविटी का मुद्दा

सुझावों में ग्रोथ कॉरिडोर, इनर और आउटर रिंग रोड तथा स्थानीय विकास योजनाओं के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने की मांग की गई है। पश्चिमी रिंग रोड और सीहोर-मंडीदीप की विकास योजनाओं के बीच सड़क संपर्क बनाए रखने के साथ गांवों के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रावधान करने का सुझाव भी दिया गया है। इसके अलावा किफायती आवास परियोजनाओं को व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।

एफएआर, टीडीआर और पार्किंग नियमों में बदलाव की मांग

क्रेडाई ने अतिरिक्त निर्माण क्षमता यानी एफएआर, ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर), पार्किंग, भवनों की ऊंचाई और खुली जगह से जुड़े मानकों में व्यावहारिक समन्वय का प्रस्ताव रखा है। क्रेडाई मध्यप्रदेश ने यह सुझाव भी दिया कि जो डेवलपर अपने खर्च से सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करते हैं, उन्हें इसके अनुरूप एफएआर का लाभ दिया जाना चाहिए।

‘कमाल का भोपाल’ अभियान का भी जिक्र

मनोज मीक ने कहा कि क्रेडाई वर्ष 2006 से भोपाल के नए मास्टर प्लान के लिए प्रयास कर रहा है। इस दौरान शहरी विकास के अध्ययन, तुलनात्मक शोध और स्थानीय जरूरतों के आधार पर सुझाव दिए गए हैं। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के माध्यम से भी शहर की विरासत, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है।

मीक के अनुसार, मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल निर्माण की अनुमति तय करना नहीं, बल्कि रोजगार और निवेश बढ़ाना, बेहतर आवास उपलब्ध कराना और नागरिक सुविधाओं में सुधार करना भी होना चाहिए। अब जरूरी है कि आपत्तियों पर समयबद्ध निर्णय लेकर योजना को अंतिम प्रकाशन तक पहुंचाया जाए। इससे राजधानी के आगामी विकास को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है।

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