सांसों से तनाव कम करने का विज्ञान समझाया, एम्स भोपाल के डॉ. वरुण मल्होत्रा ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में दिया सत्र

धीमी और गहरी श्वास के प्रभावों पर प्रस्तुति, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी से निपटने पर भी चर्चा

भोपाल। एम्स भोपाल के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा ने धर्मशाला में आयोजित आठवें अंतरराष्ट्रीय लेह सिम्पोजियम में ध्यान और श्वास के वैज्ञानिक पहलुओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नियंत्रित श्वास और ध्यान के अभ्यास तनाव कम करने तथा शरीर को शांत रखने में सहायक हो सकते हैं।

हाइपोबैरिक हाइपोक्सिक सोसाइटी, दिल्ली की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी का विषय ‘हाइपोक्सिया में फुफ्फुसीय रोगों के लिए चिकित्सीय लक्ष्य और आणविक पहलू’ था। हाइपोक्सिया वह स्थिति है, जिसमें शरीर के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

90 मिनट का अनुभवात्मक सत्र

डॉ. मल्होत्रा ने ‘ब्रीद, ब्रेन एंड काम: साइंटिफिक इनसाइट्स इनटू गाइडेड योगिक मेडिटेशन’ विषय पर 90 मिनट का सत्र लिया। इसमें उन्होंने योगदा सत्संग परंपरा से जुड़े ध्यान अभ्यासों की जानकारी दी। सत्र में प्रार्थना, मंत्रोच्चार, श्वास पर ध्यान, क्रमिक विश्राम और कल्पना आधारित अभ्यास शामिल थे। उन्होंने 20:20:20 श्वास तकनीक के बारे में भी बताया, जिसमें 10 की गिनती तक सांस लेना, रोकना और छोड़ना शामिल है।

उन्होंने समझाया कि धीमी और गहरी श्वास से शरीर के विश्राम से जुड़े तंत्रिका तंत्र की सक्रियता बढ़ सकती है। इससे हृदय गति परिवर्तनशीलता में सुधार और तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। ध्यान का संबंध मस्तिष्क के उन हिस्सों की गतिविधियों से भी है, जो एकाग्रता और भावनात्मक नियंत्रण में भूमिका निभाते हैं।

ऑक्सीजन स्तर पर वीडियो प्रस्तुत किया

पैनल चर्चा के दौरान डॉ. मल्होत्रा ने एक वीडियो प्रस्तुत किया, जिसमें पल्स ऑक्सीमीटर से मापी गई ऑक्सीजन संतृप्ति कुछ मिनटों में 77 से बढ़कर 83 प्रतिशत होती दिखाई गई। उन्होंने इस अनुभव को अमरनाथ और कैलाश पर्वत जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले सैनिकों, ट्रेकर्स और तीर्थयात्रियों के लिए उपयोगी संभावित विषय बताया।

हालांकि, ऑक्सीजन संतृप्ति में इस बदलाव को नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन के बिना केवल श्वास अभ्यास का परिणाम नहीं माना जा सकता। 77 प्रतिशत ऑक्सीजन संतृप्ति बहुत कम है और ऐसी रीडिंग आने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

इस सत्र में पारंपरिक योगिक अभ्यासों और आधुनिक शरीर क्रिया विज्ञान के बीच संबंधों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को श्वास, मस्तिष्क और मन के संबंधों की वैज्ञानिक समझ देना तथा तनाव प्रबंधन के गैर-औषधीय तरीकों से परिचित कराना था।

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