सवर्ण समाज के मुद्दों पर नेताओं की चुप्पी के विरोध में प्रतीकात्मक मुंडन और पिंडदान

आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट और अन्य मुद्दों पर आवाज नहीं उठाने का लगाया आरोप
भोपाल। सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की कथित चुप्पी के विरोध में सोमवार को प्रतीकात्मक रूप से मुंडन संस्कार, पिंडदान, अंतिम संस्कार और आत्मा शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चुनाव के दौरान सवर्ण समाज के वोटों से विधायक और सांसद बनने वाले नेता समाज से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने से पीछे हट रहे हैं।
आयोजकों ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट, जातिगत आरक्षण, यूजीसी से जुड़े विषयों और सवर्ण समाज के साथ होने वाली कथित प्रताड़नाओं के खिलाफ जब जनप्रतिनिधियों से आवाज उठाने की अपेक्षा की जाती है, तब वे मौन नजर आते हैं। इसी चुप्पी के विरोध में नेताओं के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार और पिंडदान का कार्यक्रम किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को उनके प्रति जवाबदेही की याद दिलाना है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सभी वर्गों के हितों और अधिकारों की आवाज सदन में उठाना है।
आयोजकों ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में सवर्ण समाज अपने अधिकारों और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर संगठित होकर आवाज उठाएगा। साथ ही समाज के मुद्दों पर मौन रहने वाले नेताओं से सवाल किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और कहा कि समाज अब केवल चुनाव के समय किए जाने वाले वादों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि जनप्रतिनिधियों से उनके कार्यों का हिसाब भी मांगेगा।





