आठ संभागों के 62 मामलों में अनियमितताएं, सात बर्खास्त; 38 मामलों में वसूली के आदेश
भोपाल। नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की दरों में अंतर को लेकर अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का वायरल वीडियो चर्चा में है। वीडियो में अलग-अलग निकायों में एक जैसी सामग्री की कीमतों में अंतर का मुद्दा उठाया गया है। इसी बीच विभागीय जांच समीक्षा प्रतिवेदन में प्रदेश के आठ संभागों के 62 मामलों में 146 अधिकारी-कर्मचारियों को चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में नियम विरुद्ध संविलियन, अनियमित भुगतान, निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी में गड़बड़ियों से सरकारी खजाने को नुकसान होने का उल्लेख है। हालांकि, इन सभी मामलों का वायरल वीडियो से सीधा संबंध प्रमाणित नहीं है।
सात कर्मचारी बर्खास्त, 76 की वेतनवृद्धि रोकी
विभागीय जांच के अनुसार, सात अधिकारी-कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 76 की वेतनवृद्धि रोकी या निरस्त की गई। इसके अलावा 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती की गई है। 38 मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश भी जारी किए गए हैं।
जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर 22 अधिकारी-कर्मचारियों को दोषमुक्त किया गया, जबकि पांच मामलों में चेतावनी या परिनिंदा की कार्रवाई हुई। ये आंकड़े नगरीय निकायों में सरकारी खर्च, खरीदी प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं।
संविलियन में 3.20 करोड़ का नुकसान
प्रतिवेदन के मुताबिक, शहडोल संभाग की डूमरकछार, डोला, बनगवां और बकहो नगर परिषदों में नियम विरुद्ध संविलियन के कारण शासन को करीब 3.20 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
प्रकरणों की संख्या के मामले में ग्वालियर संभाग सबसे आगे रहा। यहां 16 मामलों में 32 अधिकारी-कर्मचारियों को चिह्नित किया गया है। सीहोर में सड़क निर्माण से जुड़ी अनियमितताओं के कारण 29.08 लाख रुपये और तरीचरकलां में सामग्री अधिक दर पर खरीदने से 26.16 लाख रुपये की क्षति दर्ज की गई है।
खरीदी की दरों पर निगरानी का सवाल
संजय दुबे के वायरल वीडियो में सरकारी खरीदी की दरों में अंतर का मुद्दा उठने के बाद विभागीय जांच के ये आंकड़े महत्वपूर्ण हो गए हैं। हालांकि, वीडियो में उठाए गए सवालों और समीक्षा प्रतिवेदन में दर्ज मामलों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए अलग-अलग प्रकरणों के तथ्यों का मिलान जरूरी है।
सरकारी खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह देखना भी अहम होगा कि अलग-अलग निकायों में एक जैसी सामग्री की दरों में अंतर क्यों है, खरीद के लिए दरें तय करने की प्रक्रिया क्या रही और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
