शिक्षक दिवस पर अखिल भारतीय कलामंदिर ने किया श्रेष्ठ शिक्षकों का सम्मान

शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति में योगदान देने वाली विभूतियां सम्मानित; ‘भोपाली’ पं. नंदकिशोर शर्मा ‘संगीताचार्य’ की 126वीं जयंती पर किया स्मरण
भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय कलामंदिर, भोपाल की ओर से 5 सितंबर 2026 को विश्व संवाद केंद्र, शिवाजी नगर में श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में स्वर्गीय ‘भोपाली’ पं. नंदकिशोर शर्मा ‘संगीताचार्य’ की 126वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान कला और संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया गया।
आलोक शर्मा ने कहा- शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माता
समारोह के मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में उमेश गुप्ता और डॉ. प्रकाश बरतूनिया मौजूद रहे। इस अवसर पर अखिल भारतीय कलामंदिर के अध्यक्ष डॉ. गोरीशंकर शर्मा ‘गौरव’, कार्यकारी अध्यक्ष हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’, उपाध्यक्ष चौ. मदन मोहन ‘समर’, उपाध्यक्ष डॉ. प्रभात पाण्डेय और महासचिव एच.के. श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आलोक शर्मा ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद शास्त्रीय गायन, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वंदे मातरम् की भावपूर्ण प्रस्तुति ने कार्यक्रम में देशभक्ति का माहौल बना दिया।
इन शिक्षकों का हुआ सम्मान
श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में उल्हास तेलंग, डॉ. प्रभात पाण्डेय, डॉ. प्रकाश बरतूनिया, डॉ. राजेश तिवारी, डॉ. अनीता तिवारी, रमेश जोशी, श्रीकृष्ण देव चतुर्वेदी और गीतिका लोहट शामिल रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्यकार, कलाकार और कला-संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे। आयोजन में शिक्षक सम्मान के साथ भारतीय कला, संगीत और संस्कृति को भी प्रमुखता दी गई।
अखिल भारतीय कलामंदिर का यह समारोह शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के साथ ही कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देने वाला आयोजन रहा।





