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वायु प्रदूषण पर NGT सख्त, विभागों को दो सप्ताह में जवाब देने के निर्देश

भोपाल में सड़क की धूल, वाहनों का धुआं और खुले में कचरा जलाना प्रदूषण के प्रमुख कारण; त्योहारों पर नियमों का पालन कराने को कहा

भोपाल, 13 अक्टूबर।मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने संबंधित विभागों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। जमीन पर प्रभावी कार्रवाई और नियमित निगरानी भी जरूरी है। त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए भी नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। यह आदेश मूल आवेदन क्रमांक 192/2025 (CZ), राशिद नूर खान विरुद्ध मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में 13 अक्टूबर को पारित किया गया। मामले में आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी उपस्थित रहे। पीठ में न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे।

भोपाल में प्रदूषण के स्तर में मामूली कमी

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में वर्ष 2023-24 में PM10 का वार्षिक औसत स्तर 113 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। वर्ष 2024-25 में यह घटकर 110 माइक्रोग्राम रह गया। इस तरह करीब तीन प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, इंदौर में इसी अवधि के दौरान PM10 का स्तर 99 से बढ़कर 108 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया।

सड़क की धूल और वाहनों के धुएं पर जोर

प्रकरण में प्रस्तुत अध्ययन के अनुसार, सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य और खुले में कचरा जलाना प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। भोपाल में प्रदूषण वाले चिह्नित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने, सड़कों की सक्शन मशीनों से सफाई कराने और निर्माण सामग्री व मलबे का उचित प्रबंधन करने पर जोर दिया गया। खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने और सड़क किनारे पौधरोपण करने की जरूरत भी बताई गई। वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी के लिए निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें प्रदूषण वाले क्षेत्रों के अनुसार स्थापित करने का सुझाव भी सामने आया।

त्योहारों पर नियमों का पालन जरूरी

अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों, राज्य सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित आदेशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। वायु गुणवत्ता खराब होने पर उसके स्तर के अनुसार जरूरी कदम उठाने और विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने सुनवाई में बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बैठकें की जा रही हैं और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकरण ने 20 मई 2026 के पूर्व आदेश के अनुपालन में राज्य और जिला स्तरीय समितियों के फैसलों के अनुसार कार्रवाई करने तथा अगली सुनवाई से पहले प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।

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