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रेलवे भर्ती बोर्ड भोपाल में राजभाषा सप्ताह-2026 का शुभारंभ

भोपाल। रेलवे भर्ती बोर्ड, भोपाल में सोमवार से राजभाषा सप्ताह-2026 की शुरुआत हुई। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग और रेल मंत्रालय के निर्देशानुसार यह आयोजन 7 से 14 सितंबर 2026 तक चलेगा। पहले दिन ‘राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका’ विषय पर हिंदी निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कार्यालय के रेलकर्मियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों ने पूरे वर्ष दैनिक सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करने का संकल्प भी लिया।

राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक

राजभाषा सप्ताह के पहले दिन राजभाषा कार्यान्वयन समिति की जून 2026 में समाप्त तिमाही की समीक्षा बैठक भी हुई। बैठक की अध्यक्षता रेलवे भर्ती बोर्ड की अध्यक्ष एवं कार्यालय प्रमुख रश्मि दिवाकर ने की।

संपर्क राजभाषा अधिकारी एवं समिति के सचिव अनिल कुमार सिन्हा ने बैठक की जानकारी दी। इसके बाद सदस्य सचिव निरीश कुमार राजपूत ने रश्मि दिवाकर का पौधा भेंट कर स्वागत किया।

हिंदी को बताया संवैधानिक दायित्व

अध्यक्ष रश्मि दिवाकर ने कहा कि भारतीय रेल देश की जीवन रेखा है और इतने बड़े संगठन में लोगों से प्रभावी संवाद के लिए भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। रेलवे भर्ती बोर्ड का सीधा संबंध देशभर के युवाओं और परीक्षार्थियों से है, इसलिए कार्यालयीन कार्यों में राजभाषा हिंदी का उपयोग करना नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं की जानकारी आम लोगों तक सरलता से पहुंचाने के लिए हिंदी प्रभावी माध्यम है। उन्होंने हिंदी दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा, “हिंदी ही वह भाषा है जो संपूर्ण देश को एक सूत्र में बांध सकती है।”

लैटिन शब्दावली पर कार्यशाला

बैठक के दौरान ‘कार्यालयीन कार्य में लैटिन शब्दावली का प्रयोग’ विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें 12 अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में कार्यालयीन कार्यों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली और सरल हिंदी के प्रयोग से संबंधित जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन वरिष्ठ अनुवादक राकेश कुमार मालवीय ने किया। राजभाषा सप्ताह के दौरान रेलवे भर्ती बोर्ड में विभिन्न प्रतियोगिताएं, कार्यशालाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य कार्यालयीन कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और अधिकारियों-कर्मचारियों में राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

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