मास्टर प्लान-2047 पर पूज्य सिंधी पंचायत की आपत्ति, बैरागढ़ के भूमि उपयोग में बदलाव की मांग

बेहटा की पुरानी आवासीय कॉलोनी को आवासीय रखने और बैरागढ़ कलां-भैंसाखेड़ी में निम्न घनत्व आवासीय क्षेत्र घोषित करने का सुझाव

भोपाल। भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप को लेकर संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में भी विरोध सामने आया है। पूज्य सिंधी पंचायत ने बैरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों के भूमि उपयोग में प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति जताते हुए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को सुझाव पत्र सौंपा है। पंचायत अध्यक्ष माधु चांदवानी ने मांग की है कि पुराने आवासीय क्षेत्रों की स्थिति बरकरार रखी जाए और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए आवासीय विकास के लिए भी पर्याप्त जगह दी जाए।

पंचायत का कहना है कि मास्टर प्लान के प्रारूप में कुछ स्थानों के भूमि उपयोग का निर्धारण स्थानीय परिस्थितियों, पहले से हुए विकास और रहवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसके लिए पंचायत ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

बेहटा की कॉलोनी को आवासीय रखने की मांग

माधु चांदवानी के अनुसार, सीहोर नाका के पास ग्राम बेहटा के खसरा नंबर 1, 4 और 6 की जमीन पर पुरानी स्वीकृत आवासीय कॉलोनी विकसित है। वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में इस क्षेत्र को आवासीय बताया गया था। पंचायत का दावा है कि नगर निगम से लेआउट स्वीकृत होने के बाद यहां विकास कार्य भी कराए गए और सैकड़ों परिवार लंबे समय से रह रहे हैं।

इसके बावजूद मास्टर प्लान-2047 के प्रारूप में इस क्षेत्र को भोजताल इन्फ्लुएंस जोन-2 में दर्शाया गया है। पंचायत ने इसे त्रुटिपूर्ण बताते हुए भूमि उपयोग में संशोधन कर पूर्व की तरह आवासीय श्रेणी में रखने की मांग की है।

25 एकड़ के भूखंड की शर्त पर सवाल

पंचायत ने इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग के दक्षिण में स्थित ग्राम बैरागढ़ कलां और भैंसाखेड़ी की जमीन के लिए प्रस्तावित बोटैनिकल गार्डन श्रेणी पर भी आपत्ति जताई है। चांदवानी के मुताबिक, प्रारूप में संबंधित गतिविधियों के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर यानी करीब 25 एकड़ के भूखंड की शर्त रखी गई है।

पंचायत का कहना है कि इतनी बड़ी जमीन एक व्यक्ति के पास होना आम तौर पर व्यावहारिक नहीं है। इस तरह की शर्तों से छोटे भू-स्वामियों के लिए अपनी जमीन का उपयोग करना मुश्किल हो सकता है। संगठन ने इस क्षेत्र को निम्न घनत्व आवासीय क्षेत्र घोषित करने का सुझाव दिया है, ताकि भूमि मालिक नियमानुसार आवासीय विकास कर सकें।

बैरागढ़ के विस्तार के लिए पर्याप्त जगह देने की मांग

चांदवानी ने कहा कि बैरागढ़ के भविष्य के विस्तार और विकास के लिए मास्टर प्लान में स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। पंचायत के अनुसार, मुख्य मार्ग के दोनों ओर आवासीय गतिविधियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से क्षेत्र के नियोजित विकास पर असर पड़ सकता है।

पंचायत ने अपनी प्रमुख मांगों में ग्राम बेहटा के खसरा नंबर 1, 4 और 6 का भूमि उपयोग आरजी-2 करने, इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग के उत्तर में आवासीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आरजी-3 घोषित करने और दक्षिण दिशा में बैरागढ़ कलां व भैंसाखेड़ी को आरजी-5 यानी निम्न घनत्व आवासीय क्षेत्र बनाने का सुझाव दिया है।

पंचायत ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पहले स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाए। उसका कहना है कि पुराने आवासीय क्षेत्रों की स्थिति और भविष्य की विकास जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर ही संत हिरदाराम नगर का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

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