रांची। अमरदीप कुमार का नाम सुनकर शायद किसी को अंदाजा नहीं होगा कि इस खिलाड़ी ने कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अमरदीप चार बार विदेश यात्रा कर चुके हैं और भारत की जर्सी पहनकर खेल चुके हैं। मलेशिया में आयोजित थ्रोबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर देश का तिरंगा लहराया था।
अमरदीप ने अपनी खेल प्रतिभा से झारखंड का नाम रोशन किया और देश के लिए सम्मान हासिल किया। लेकिन आज उनकी जिंदगी की तस्वीर काफी अलग है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रांची के अरगोड़ा चौक पर अमरदीप धनिया-मिर्च और अन्य सब्जियां बेचकर अपना गुजारा कर रहे हैं।
एक समय जिस खिलाड़ी ने देश के लिए मैदान पर पसीना बहाया और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीता, आज उसे परिवार चलाने के लिए सड़क किनारे सामान बेचना पड़ रहा है। उनकी यह स्थिति खेल प्रतिभाओं और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
अमरदीप कुमार की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उन खिलाड़ियों की स्थिति पर भी सवाल उठाती है, जो देश के लिए पदक जीतते हैं, लेकिन खेल जीवन खत्म होने के बाद आर्थिक परेशानियों से जूझते हैं।
जरूरत इस बात की है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के लिए सम्मान के साथ-साथ रोजगार और भविष्य की बेहतर व्यवस्था भी हो। अमरदीप की कहानी बताती है कि मेडल जीतना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन खिलाड़ी के भविष्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
