मध्यप्रदेश में चीनी स्टॉक की सीमा तय, डीलर 4 हजार क्विंटल से ज्यादा नहीं रख सकेंगे

30 दिन से अधिक स्टॉक रखने पर रोक, थोक उपभोक्ताओं के लिए भी नियम तय

भोपाल। मध्यप्रदेश में चीनी के स्टॉक और भंडारण को लेकर राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि अब प्रदेश में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही चीनी का स्टॉक 30 दिन से अधिक अवधि तक भंडारित करने पर भी रोक रहेगी।

मंत्री ने बताया कि इस संबंध में सभी कलेक्टरों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सभी डीलरों के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की घोषणा नियमित रूप से अपडेट करना अनिवार्य होगा।

PDS के लिए रखे स्टॉक पर लागू नहीं होगी सीमा

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह स्टॉक सीमा सरकारी खाते में रखी गई चीनी पर लागू नहीं होगी। राज्य सरकार या उसके द्वारा अधिकृत किसी प्राधिकारी के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों में वितरण के लिए किसी डीलर के पास रखे गए स्टॉक को भी इस सीमा से बाहर रखा गया है।

थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक लिमिट

चीनी के बड़े उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक रखने की अवधि निर्धारित की गई है। मंत्री के अनुसार जो थोक उपभोक्ता उत्पादन, उपभोग या उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में हर महीने 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी का इस्तेमाल करता है, वह 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेगा।

थोक उपभोक्ताओं की श्रेणी में हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि शामिल हैं। आदेश के अनुसार ऐसे थोक उपभोक्ता की पहचान उस इकाई के रूप में की गई है, जिसने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसतन कम से कम 100 मीट्रिक टन प्रति माह चीनी का उपयोग किया हो।

अधिकारियों को सख्ती से पालन के निर्देश

राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को नए आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। चीनी के स्टॉक की निगरानी और निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का यह कदम चीनी के अनावश्यक भंडारण और बाजार में उपलब्धता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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