केचमेंट में अवैध निर्माणों पर गहराएगा संकट, NGT ने सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई
भोपाल/जबलपुर, 1 अगस्त। राजधानी भोपाल की झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT की सेंट्रल जोन बेंच की जबलपुर पीठ ने भोज वेटलैंड, केरवा और कलियासोत जलस्रोतों के फुल टैंक लेवल (FTL) और कैचमेंट क्षेत्र के अंतिम सीमांकन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
NGT ने सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित कर तीनों जलस्रोतों के FTL से जुड़े विवाद का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए हैं। समिति जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन सर्वे के माध्यम से जलस्रोतों की सीमाओं और स्थिति का परीक्षण करेगी। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
FTL से पहले नहीं खुलेंगे भोज वेटलैंड के गेट
आदेश में जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भोज वेटलैंड में पूर्ण जलस्तर की स्थिति प्राप्त होने से पहले पानी की निकासी के लिए गेट नहीं खोले जाएं। इसका सीधा असर भदभदा सहित जल निकासी व्यवस्था पर पड़ सकता है।
NGT ने भोज वेटलैंड का FTL क्षेत्रफल 3,946.33 हेक्टेयर निर्धारित किए जाने का उल्लेख किया है। इसमें अपर लेक का 3,872.43 हेक्टेयर और लोअर लेक का 73.90 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी जलस्रोत को डैम या रिजर्वायर कहने मात्र से उसकी पर्यावरणीय प्रकृति नहीं बदल जाती। जलस्रोतों का संरक्षण वर्तमान के साथ भावी पीढ़ियों के हित से भी जुड़ा है।
अब सामने आएगी कैचमेंट की मूल सीमा
भोपाल के तीनों प्रमुख जलस्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। आरोप हैं कि कैचमेंट क्षेत्रों में समय के साथ बड़े भवन, मैरिज गार्डन, फार्म हाउस और अन्य निर्माण हुए हैं। अब विशेषज्ञ समिति के सर्वे के बाद इन क्षेत्रों की वास्तविक और मूल सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यदि FTL के वास्तविक स्तर तक पानी भरने के बाद ही निकासी की अनुमति मिलती है, तो जलस्रोतों के प्राकृतिक फैलाव और कैचमेंट की स्थिति भी अधिक स्पष्ट हो सकती है। इससे ऐसे निर्माणों की वैधता और पर्यावरणीय नियमों के पालन की जांच का रास्ता भी खुल सकता है।
कैचमेंट में करीब 1100 निर्माण का दावा
स्थानीय स्तर पर दावा किया जाता रहा है कि पिछले करीब 35 वर्षों में तीनों जलस्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्माण हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कैचमेंट क्षेत्रों में करीब 1100 निर्माण होने की बात सामने आती रही है। हालांकि, इन सभी निर्माणों की वैधता और वास्तविक संख्या का अंतिम निर्धारण आधिकारिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
NGT की विशेषज्ञ समिति यदि सीमांकन और FTL का अंतिम निर्धारण करती है तो कैचमेंट क्षेत्र में मौजूद निर्माणों को लेकर प्रशासन के सामने भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित निर्माणों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
15 सितंबर को अगली सुनवाई
NGT ने अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई पर भी जोर दिया है। अब विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और सीमांकन प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है।
