बातचीत से बदलेगी सोच, खुलकर बात करने से मिलेगी मदद : एम्स भोपाल

10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर होंगे विभिन्न कार्यक्रम

भोपाल। मन की बात कहना और किसी की परेशानी को ध्यान से सुनना कई बार किसी की जान बचाने में मदद कर सकता है। इसी संदेश के साथ एम्स भोपाल के मनोचिकित्सा विभाग और नर्सिंग कॉलेज की ओर से 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2026 मनाया जाएगा।

इस अवसर पर वाद-विवाद प्रतियोगिता, पैनल चर्चा, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में आत्महत्या के जोखिम को पहचानने और जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर मदद पहुंचाने के तरीकों की जानकारी देने के लिए ‘गेटकीपर प्रशिक्षण’ सत्र भी आयोजित होगा।

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (रि.) कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) विजेंदर सिंह करेंगे। डॉ. आशीष पखारे और नर्सिंग कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजरतन आयोजन सचिव होंगे।

चुप्पी और झिझक दूर करने पर जोर

इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम ‘आत्महत्या के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव’ है। इसका संदेश ‘बातचीत की शुरुआत करें’ रखा गया है। इसका उद्देश्य आत्महत्या को लेकर समाज में मौजूद गलत धारणाओं को दूर करना और इस विषय पर खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना है।

आयोजन के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि यदि कोई व्यक्ति मानसिक परेशानी या गंभीर तनाव से गुजर रहा है तो उसकी बात को बिना किसी निर्णय के सुनना और समय पर उचित मदद उपलब्ध कराना जरूरी है। ऐसा माहौल बनाने पर जोर दिया जाएगा, जिसमें परेशानी से जूझ रहा व्यक्ति बिना डर या झिझक अपनी बात कह सके।

2003 से मनाया जा रहा है दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में हर साल 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत वर्ष 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की थी। तब से हर वर्ष 10 सितंबर को यह दिवस मनाया जाता है।

एम्स भोपाल का आयोजन लोगों में जागरूकता बढ़ाने, आत्महत्या से जुड़े कलंक को कम करने और जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करने के महत्व पर केंद्रित रहेगा।

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