फर्जी वसीयत के आधार पर एक एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप, न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद सीमांकन पर उठाए सवाल

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ोपाल। हुजूर तहसील के ग्राम चौपड़ा कला में खसरा नंबर 167 की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। किसानों ने राजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत कर गलत सीमांकन और बटान करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद बिना सूचना दिए सीमांकन और बटान की कार्रवाई की गई। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जमीन का सही सीमांकन कराने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, खसरा नंबर 167 की कुल 13 एकड़ 13 डेसीमील जमीन कुंजीलाल शर्मा के नाम पर थी। उनके तीन पुत्र बबलू शर्मा, तुमसीराम शर्मा और राजेंद्र प्रसाद शर्मा हैं। परिवार के संयुक्त निर्णय से करीब आठ एकड़ जमीन अलग-अलग लोगों को बेची गई थी। इसके बाद परिवार के पास पांच एकड़ 33 डेसीमील जमीन बची है। किसानों का आरोप है कि संदीप अग्रवाल ने कुंजीलाल शर्मा की एक एकड़ जमीन की कथित फर्जी वसीयत के आधार पर रजिस्ट्री कराई और नामांतरण भी करवा लिया। करीब दस साल पुराने इस मामले में बाद में जमीन अशोक पटेल, जितेंद्र पटेल और प्रतिंद्र पटेल को बेच दी गई। किसानों का कहना है कि संदीप अग्रवाल कभी कुंजीलाल शर्मा के पुत्रों से मिलने तक नहीं आए।

आवेदन के बाद भी नहीं हुआ सीमांकन

किसानों के अनुसार, बची हुई पांच एकड़ 33 डेसीमील जमीन के सीमांकन के लिए करीब दो महीने पहले तहसीलदार के यहां आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद सीमांकन नहीं किया गया। वहीं, करीब एक महीने पहले तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी ने बिना सूचना दिए सीमांकन कर दिया। किसानों का आरोप है कि इस कार्रवाई में राम सिंह तोमर की जमीन की करीब दस फीट भूमि अशोक पटेल के हिस्से में जोड़ दी गई। उनका कहना है कि खसरे में स्कूल, राजू राठौर, अशोक बंसल, मदन गुप्ता का धर्मकांटा, राम सिंह तोमर सहित एक दर्जन से अधिक अन्य हिस्सेदार भी हैं। इनमें कई लोगों की आधा डेसीमील या इससे कम-ज्यादा जमीन है, लेकिन सीमांकन और बटान के दौरान किसी को सूचना नहीं दी गई और न ही मौके पर बुलाया गया।

तहसीलदार पर लगाए गंभीर आरोप

किसान तुलसीराम शर्मा और राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने तहसीलदार अतुल शर्मा पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीन के सभी हिस्सेदारों को नजरअंदाज कर केवल अशोक पटेल और संदीप अग्रवाल के पक्ष में सीमांकन किया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पैसे लेकर की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तीन पुत्र होने पर बाहरी व्यक्ति को वसीयत क्यों?

किसान तुलसीराम शर्मा ने सवाल उठाया कि जब कुंजीलाल शर्मा के तीन पुत्र थे और वह उनके साथ ही रहते थे, तो उन्होंने किसी बाहरी व्यक्ति के नाम एक एकड़ जमीन की वसीयत क्यों की? उनका कहना है कि पिता ने कभी ऐसी वसीयत की जानकारी परिवार को नहीं दी। यदि वसीयत की गई होती तो परिवार के सदस्यों को इसकी जानकारी जरूर होती।

किसानों ने यह भी दावा किया कि जमीन पैतृक संपत्ति है, इसलिए वसीयत की वैधता पर सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन स्वयं अर्जित संपत्ति थी, तभी उसके संबंध में वसीयत की जा सकती थी। हालांकि, संपत्ति की प्रकृति और वसीयत की वैधता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही हो सकेगा।

सीमांकन से पहले बटान करने पर सवाल

किसानों ने राजस्व विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमानुसार पहले जमीन का सीमांकन किया जाना चाहिए और उसके बाद सभी हिस्सेदारों के अधिकार के अनुसार बटान होना चाहिए। आरोप है कि यहां पहले बटान कर दिया गया और सीमांकन की प्रक्रिया में भी सभी हिस्सेदारों को शामिल नहीं किया गया।

इनका कहना है।

आवेदन के बाद सीमांकन की प्रक्रिया की गई थी किसी कारण वश आज कार्रवाई नहीं सकी है आगामी दिनों में जल्द इस प्रक्रिया को निष्पक्ष किया जाएगा।

शुभम जैन, तहसीलदार , हुजूर

मेरे ऊपर आरोप निराधार है में पिछले 6 महीने से उस क्षेत्र को नहीं देख रहा हूं,

अतुल शर्मा, तत्कालीन तहसीलदार, हुजूर

किसानों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, विवादित जमीन का न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार सीमांकन किया जाए और सभी हिस्सेदारों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

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