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छात्रावासों और आवासीय स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता की होगी जांच

शिकायतों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने बनाई दो टीमें, भोजन के नमूने लेकर प्रयोगशाला में कराएंगे परीक्षण

भोपाल। छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने इसके लिए दो निरीक्षण दल गठित किए हैं। ये दल जिले के सभी सरकारी और निजी छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों, कॉलेजों की मेस, कैंटीन और भोजनालयों का निरीक्षण करेंगे।

पिछले सप्ताह से भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री के रखरखाव, रसोई की साफ-सफाई और भोजन परोसने की व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इनमें अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रावासों और श्रमोदय आवासीय विद्यालयों से जुड़ी शिकायतें भी शामिल हैं। 12 अक्टूबर को हुई जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति और टीएल बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था।

गठित दोनों दलों में जेपी लवंशी, वर्षा व्यास, अर्चना प्रभाकर, जगदीश विश्वकर्मा, साधना सक्सेना और पूजा शाक्य को शामिल किया गया है। ये दल अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रावासों के साथ निजी आवासीय संस्थानों की भी जांच करेंगे।

इन बिंदुओं पर होगी जांच

निरीक्षण के दौरान मेस और कैंटीन के खाद्य सुरक्षा पंजीयन और लाइसेंस की जांच की जाएगी। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उसकी वैधता अवधि, खरीदी के बिल और आपूर्ति के स्रोत की जानकारी ली जाएगी। रसोईघर, भंडारगृह, बर्तन और उपकरणों की साफ-सफाई भी देखी जाएगी। दूध, दही, पनीर, तेल, घी, मसाले, आटा, दाल, चावल और सब्जियों की गुणवत्ता जांची जाएगी।

इसके अलावा पेयजल की गुणवत्ता, भोजन के सुरक्षित भंडारण, रसोई कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और भोजन परोसने की व्यवस्था का निरीक्षण होगा। खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाएंगे।

जांच में गड़बड़ी मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। गंभीर अनियमितता मिलने पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी जाएगी। दोनों दल तत्काल निरीक्षण शुरू करेंगे और अपनी जांच रिपोर्ट में मिली कमियों, लिए गए नमूनों, जारी नोटिस और कार्रवाई का विवरण देंगे। संबंधित विभागों को संस्थानों की सूची और संचालकों की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी संस्थान जांच से छूटे नहीं।

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