गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा की तैयारियों को मिला नया संकल्प

राम-जानकी मंदिर में समाजसेवियों की बैठक सम्पन्न, शरद पूर्णिमा पर परिक्रमा आयोजित करने का निर्णय; अब हर शनिवार होगी साप्ताहिक बैठक

गोहद। ब्रज क्षेत्र गौ-हद धाम की परिकल्पना को जनअभियान का स्वरूप देने और प्रस्तावित गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से मंगलवार को राम-जानकी मंदिर, सदर बाजार गोहद में समाजसेवियों एवं अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में गोहद की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने तथा प्रस्तावित नगरकोट परिक्रमा को भव्य एवं व्यवस्थित रूप से आयोजित करने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से शरद पूर्णिमा की पावन तिथि को गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा के लिए सुनिश्चित किया गया।

बैठक में उपस्थित समाजसेवियों ने कहा कि यह परिक्रमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं होगी, बल्कि गोहदवासियों को अपनी मातृभूमि, अपनी आस्था, अपनी प्राचीन विरासत और ब्रज संस्कृति से जोड़ने का जनअवसर बनेगी। परिक्रमा के माध्यम से गोहद के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, उनकी पहचान और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।

हर शनिवार होगी नियमित बैठक

अभियान को निरंतर गति देने के लिए बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। अब प्रत्येक शनिवार को गौ-हद धाम अभियान की साप्ताहिक बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में परिक्रमा की तैयारियों, मार्ग व्यवस्था, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों से समन्वय, संतजनों का मार्गदर्शन, जनसंपर्क, स्वयंसेवक व्यवस्था, प्रचार-प्रसार तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर क्रमबद्ध रूप से कार्य किया जाएगा।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गौ-हद धाम किसी एक व्यक्ति अथवा संगठन का अभियान न होकर गोहद के प्रत्येक नागरिक और धामवासी की साझा भावना बने। समाज के विभिन्न वर्गों, संतजनों, युवाओं, मातृशक्ति, व्यापारियों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों को इससे जोड़ने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जाएंगे।

“विचार से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी”

बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि गोहद की पहचान केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि सदियों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। आवश्यकता है कि इस विरासत को व्यवस्थित रूप से सामने लाया जाए और आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए।

गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। अब साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से अभियान की तैयारियों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाली परिक्रमा भव्यता के साथ-साथ अनुशासन, आस्था और सामाजिक सहभागिता का उदाहरण बन सके।

बैठक का संदेश स्पष्ट रहा कि अपनी मातृभूमि से जुड़ें, अपनी विरासत को पहचानें और गौ-हद धाम के निर्माण के संकल्प में सहभागी बनें।

ब्रज क्षेत्र–गौ-हद धाम जनअभियान अब नियमित बैठकों के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने और नगरकोट परिक्रमा को ऐतिहासिक स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

गोहद बने — गौ-हद धाम।

आस्था • विरासत • संस्कृति • जनभागीदारी

Exit mobile version