अजय सिंह ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, शिक्षकों की कमी का आरोप

कहा- सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी दूर करे सरकार

भोपाल, 17 सितंबर। मध्यप्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी, निजी स्कूलों की फीस और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अजय सिंह ने कहा कि विंध्य और बुंदेलखंड सहित प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। उनके अनुसार, एक लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ ग्रामीण स्कूलों में भवन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। बारिश के दौरान जर्जर भवनों और टपकती छतों से विद्यार्थियों को परेशानी होती है। उन्होंने सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की नियमित भर्ती और स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग की।

अजय सिंह ने स्कूलों के बंद या विलय किए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसका असर दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है और विशेषकर छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए 33 हजार सरकारी स्कूलों के बंद या मर्ज होने और एक लाख से अधिक शिक्षक पद खाली होने के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों से इस समय नहीं हो सकी है।

निजी स्कूलों की फीस को लेकर उन्होंने कहा कि फीस, किताबों और यूनिफॉर्म के खर्च से अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्कों की निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

उन्होंने उच्च शिक्षा को लेकर भी सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाए और कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं पर संवाद जरूरी है।

अजय सिंह ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर नहीं की गई तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी।

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