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6 साल बाद मिला शिक्षक सम्मान: 2020 में चयन, शिकायत के बाद रुका पुरस्कार; हाईकोर्ट के आदेश के बाद अजीता द्विवेदी को 2026 में सम्मान

शिक्षक दिवस पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित, बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थानीय सामग्री से नवाचार करने वाली शिक्षिका ने अधिकार के लिए लड़ी लंबी कानूनी लड़ाईभोपाल। शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को मध्यप्रदेश के प्रतिभावान शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें सीधी जिले की शिक्षिका अजीता द्विवेदी भी शामिल रहीं। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें सम्मानित किया। अजीता द्विवेदी के लिए यह सम्मान इसलिए खास रहा, क्योंकि इसके लिए उन्हें करीब छह साल तक इंतजार और कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।अजीता द्विवेदी का वर्ष 2020 में पुरस्कार के लिए चयन हुआ था। लोक शिक्षण संचालनालय की राज्य स्तरीय सूची में उनका नाम शामिल था। इसी दौरान उनके चयन को लेकर शिकायत की गई, जिसके बाद पुरस्कार को होल्ड कर दिया गया और जिला शिक्षा अधिकारी, सीधी से चयन के संबंध में जवाब मांगा गया।जिला शिक्षा अधिकारी ने चयन को बताया था सहीमामले में जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से विभाग को भेजे गए जवाब में अजीता द्विवेदी के चयन को सही बताया गया था। इसके बावजूद पुरस्कार तत्काल नहीं मिल सका। मामला लंबे समय तक विभागीय स्तर पर लंबित रहा।इसके बाद शिक्षिका ने अपने अधिकार के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय की कार्यवाही के बाद उन्हें पुरस्कार के लिए पात्र माना गया। हालांकि न्यायालय के आदेश के बावजूद सम्मान मिलने में काफी समय लगा और आखिरकार 2026 में उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया।बच्चों को पढ़ाने में करती हैं स्थानीय सामग्री का इस्तेमालअजीता द्विवेदी अपने शिक्षण नवाचारों के लिए जानी जाती हैं। वे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए आसपास आसानी से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल करती रही हैं। नीम के फूल, पिस्ता के छिलके, माचिस की तीलियां, कंकड़ और पत्थरों जैसी सामान्य वस्तुओं के जरिए उन्होंने बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने के प्रयोग किए।नाम लिखना, अक्षर ज्ञान और गिनती सिखाने के लिए भी उन्होंने गतिविधि आधारित तरीकों को अपनाया। इन नवाचारों का उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और रचनात्मकता बढ़ाना रहा।2020 के चयन से 2026 के सम्मान तकअजीता द्विवेदी के मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब वर्ष 2020 में उनका चयन किया गया था, जिला स्तर से चयन को सही बताया गया और बाद में न्यायालय ने भी उनकी पात्रता को स्वीकार किया, तो सम्मान मिलने में छह साल क्यों लगे।5 सितंबर 2026 को जब उन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिला, तो यह केवल एक पुरस्कार नहीं था, बल्कि लंबे इंतजार के बाद मिला उनका अधिकार भी था। यह मामला शिक्षा विभाग की पुरस्कार प्रक्रिया, शिकायतों के निपटारे और न्यायालय के आदेशों के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गति पर भी सवाल खड़े करता है।शिक्षक दिवस पर अजीता द्विवेदी को मिला सम्मान यह संदेश देता है कि शिक्षक के नवाचार और योगदान की पहचान जरूरी है, लेकिन उसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी चयनित शिक्षक को अपने सम्मान के लिए वर्षों तक विभागीय प्रक्रिया और कानूनी लड़ाई का सामना न करना पड़े।अगर आपके पास हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी/याचिका क्रमांक है, तो इसे खबर में जोड़कर मैं इसे और मजबूत फैक्ट-चेक्ड और कानूनी रूप से सुरक्षित रिपोर्ट के रूप में तैयार कर सकता हूं।

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