कबीर गायन से मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर चुके राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध लोक गायक श्री कालूराम बामनिया से डॉ. अरुण कुमार “अज्ञानी” की खास बातचीत।



प्रश्न : देश का बड़ा सम्मान पद्मश्री आपको मिल चुका है। उसके बाद आपकी जिंदगी में क्या परिवर्तन आया है ?

उत्तर: पद्मश्री सम्मान मिलना मेरे जीवन का बहुत बड़ा और भावुक क्षण था। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मालवा की लोक परंपरा, कबीर वाणी और उन सभी लोक कलाकारों का सम्मान है जो वर्षों से अपनी मिट्टी और संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। इस सम्मान के बाद लोगों का प्रेम और विश्वास और अधिक बढ़ा है। अब जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा महसूस होती है कि कबीर साहेब की वाणी को नई पीढ़ी तक और अधिक गहराई से पहुंचाऊं।

प्रश्न: अब तक आप किन_किन बड़े मंचो पर किन किन बड़ी हस्तियों के सामने कबीर गायन की प्रस्तुति दे चुके हैं?

उत्तर: मुझे देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर कबीर गायन प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। मैंने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली के “आओ साधो” कार्यक्रम, इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल, राजस्थान कबीर यात्रा, भारत पर्व, काठमांडू (नेपाल) में आयोजित कबीर फेस्टिवल, पुणे के वसंतोत्सव, मुंबई के “कहत कबिरा”, भोपाल के रविंद्र भवन, मैसूर के निरंतर रंग उत्सव जैसे बड़े मंचों पर प्रस्तुति दी है। इसके अलावा मुझे अनेक विशिष्ट हस्तियों के समक्ष भी कबीर वाणी प्रस्तुत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जिनमें महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल जी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, प्रसिद्ध अभिनेता श्री अनु कपूर जी, अभिनेता श्री शिवाजी साटम जी, सुप्रसिद्ध गायक श्री उदित नारायण जी तथा अभिनेता श्री राजीव वर्मा जी प्रमुख हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर भी मेरे भजनों का प्रसारण हुआ है।

प्रश्न: अपनी पढ़ाई लिखाई और संघर्ष के कुछ खट्टे_मीठे पलों के बारे में हमारे पाठकों को बताएं?

उत्तर: मैं एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आता हूं। बचपन से ही लोक संगीत और कबीर भजनों का वातावरण मिला, लेकिन उस समय संसाधन बहुत सीमित थे। गांवों में रहकर कला को जीवित रखना आसान नहीं था। कई बार आर्थिक कठिनाइयों और मंचों की कमी का सामना करना पड़ा, लेकिन कबीर साहेब की वाणी ने हमेशा हिम्मत दी। धीरे-धीरे लोगों का प्रेम मिलता गया और संघर्ष ही मेरी सबसे बड़ी सीख बन गया। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि हर कठिनाई ने मुझे और मजबूत बनाया।

प्रश्न: आपको कब लगा कि कबीर गायन ही आपकी जिंदगी है और इसी विधा में आगे बड़ना है या इसे ही अपना करियर बनाना है ?

उत्तर: बचपन से ही कबीर भजनों के प्रति गहरा लगाव था। जब मैंने पहली बार लोगों को कबीर वाणी सुनते हुए भाव-विभोर होते देखा, तब महसूस हुआ कि यह केवल संगीत नहीं बल्कि समाज और मानवता को जोड़ने का माध्यम है। धीरे-धीरे यह मेरे जीवन का उद्देश्य बन गया। मुझे लगा कि कबीर गायन ही मेरी पहचान है और इसी के माध्यम से मैं समाज में प्रेम, सत्य और मानवता का संदेश दे सकता हूं।

प्रश्न: जीवन का सबसे बड़ा पल आपके जीवन में कब आया ?
उत्तर: मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल वह था जब मुझे 22 अप्रैल 2024 को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। वह क्षण मेरे लिए अविस्मरणीय है। उस समय मुझे लगा कि वर्षों की साधना, संघर्ष और कबीर वाणी के प्रति समर्पण को देश ने स्वीकार किया है।

प्रश्न : आपको अब_तक, कहां_कहां से किन_किन सम्मानों और पुरुस्कारों से नवाजा जा चुका है ?

उत्तर: मुझे भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ, जो मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन द्वारा राष्ट्रीय तुलसी सम्मान, दिल्ली में कबीर कोहिनूर अवॉर्ड, उज्जैन में भेराजी सम्मान जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। 28 दिसंबर 2025 को मुझे इंग्लैंड से “World Record of Excellence Award” से भी सम्मानित किया गया, जो मेरे लिए अत्यंत गौरव का विषय है। साथ ही हाल ही में मुझे आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा “A Grade Artist” की मान्यता भी प्राप्त हुई है।
मुझे विभिन्न अवसरों पर कलेक्टर एवं एस.पी. देवास द्वारा भी सम्मानित किया गया है। लोक गायन प्रतियोगिताओं और राज्य स्तरीय युवा महोत्सवों में भी कई प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न: कबीर गायन और अपनी शैली के बारे में कुछ बताएं ?

उत्तर: मैं मुख्य रूप से मालवी लोक शैली में कबीर भजनों का गायन करता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि कबीर साहेब की वाणी अपनी सहजता और मूल भाव के साथ लोगों तक पहुंचे। मैं लोक वाद्यों और पारंपरिक धुनों के माध्यम से कबीर, मीरा और गोरखनाथ जैसे संतों की वाणी प्रस्तुत करता हूं। मेरी गायकी में मालवा की मिट्टी की खुशबू और लोक जीवन की सहजता दिखाई देती है।

प्रश्न: लोक गायन हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह सुरक्षित और संरक्षित रहे इसके लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?

उत्तर: लोक गायन हमारी संस्कृति और पहचान की आत्मा है। इसे बचाने के लिए जरूरी है कि नई पीढ़ी को लोक संगीत से जोड़ा जाए। स्कूलों और कॉलेजों में लोक कला से जुड़े कार्यक्रम होने चाहिए। सरकार और समाज दोनों को लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देना चाहिए। डिजिटल माध्यमों पर भी लोक संगीत को अधिक बढ़ावा देना जरूरी है ताकि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

प्रश्न: आप बड़े बड़े मंचो पर और बड़ी हस्तियों के सामने प्रस्तुति दे चुके हो ? अब आगे क्या सपना है?

उत्तर: मेरा सपना है कि कबीर वाणी केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व तक पहुंचे। मैं चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ी कबीर साहेब के विचारों को समझे और अपने जीवन में अपनाए। साथ ही मालवा की लोक परंपरा और लोक संगीत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। मैं युवा कलाकारों को तैयार करना चाहता हूं ताकि यह परंपरा आगे निरंतर चलती रहे।

प्रश्न: आज लोक गायन को युवा भूलते जा रहे हैं। वे आधुनिक गानों में खोए रहते हैं। ऐसे युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: मैं युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि आधुनिक संगीत सुनना गलत नहीं है, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कृति को भूलना भी ठीक नहीं है। लोक संगीत हमारी मिट्टी, हमारी भाषा और हमारी परंपरा की पहचान है। कबीर साहेब की वाणी जीवन को सही दिशा देती है और मनुष्य को मानवता से जोड़ती है। युवा यदि लोक संगीत को समझेंगे तो उन्हें अपनी संस्कृति की गहराई और सुंदरता का अनुभव होगा।

Exit mobile version