Bhopal . मध्यप्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस वर्ष अप्रैल से जून के बीच सामान्य से अधिक हीटवेव की आशंका जताई है। ऐसे समय में AIIMS Bhopal द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू किए गए स्वास्थ्य जागरूकता अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की आवश्यकता बनते जा रहे हैं।
इसी कड़ी में एम्स भोपाल ने बकानिया गांव में “बीट द हीट” विषय पर स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को लू, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव के व्यावहारिक उपाय समझाना था। संस्थान के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर के नेतृत्व तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल में कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग और डायटेटिक्स विशेषज्ञों की टीम ने भाग लिया।
क्यों जरूरी हो गए हैं ऐसे स्वास्थ्य शिविर?
विशेषज्ञों के अनुसार हीटवेव अब केवल मौसमी असुविधा नहीं रही, बल्कि यह तेजी से उभरता सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। IMD और स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को पहले ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट तैयार रखने, ORS और आपात चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल और मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ते तापमान के कारण अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वहां समय पर प्राथमिक चिकित्सा, जागरूकता और शीतल स्थानों की उपलब्धता सीमित होती है।
ग्रामीणों को क्या समझाया गया?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को दोपहर के समय तेज धूप से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेने, हल्के सूती कपड़े पहनने तथा हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने की जानकारी दी।
ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक पसीना आना बंद हो जाए, चक्कर आए, उल्टी महसूस हो, शरीर का तापमान तेजी से बढ़े या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और तुरंत चिकित्सा सहायता आवश्यक होती है।
कार्यक्रम में केवल गर्मी से बचाव ही नहीं, बल्कि संतुलित पोषण, प्राथमिक उपचार और स्वस्थ जीवनशैली पर भी चर्चा की गई। डायटेटिक्स विभाग की विशेषज्ञ टीम ने गर्मी के मौसम में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक और जलयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन पर जोर दिया।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ी हैं। कई क्षेत्रों में रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने लगा है, जिससे शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिल पाती।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, खेतों और निर्माण कार्यों में लगे मजदूर सबसे अधिक जोखिम में होते हैं। इसलिए केवल अस्पताल आधारित इलाज पर्याप्त नहीं है; समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान और निवारक स्वास्थ्य सेवाएं भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही हैं।
भविष्य के लिए क्या संकेत?
एम्स भोपाल का यह अभियान इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में चिकित्सा संस्थानों की भूमिका अस्पताल परिसरों तक सीमित नहीं रहेगी। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और समय रहते जागरूकता फैलाना सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गांवों और छोटे कस्बों में इसी तरह के अभियान लगातार चलाए जाएं, तो हीटवेव से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
AIIMS भोपाल का ‘बीट द हीट’ अभियान: बढ़ती हीटवेव के बीच गांवों तक पहुंची स्वास्थ्य सुरक्षा की मुहिम
