एमबीबीएस छात्रों ने कैडेवर लैब में दिखाई दक्षता, एम्स भोपाल की डिसेक्शन प्रतियोगिता बनी ‘हैंड्स-ऑन मेडिकल एजुकेशन’ का उदाहरण

भोपाल । AIIMS Bhopal में आयोजित वार्षिक डिसेक्शन प्रतियोगिता ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा अब केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण, टीमवर्क और क्लिनिकल समझ को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। शरीर रचना विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में एमबीबीएस बैच 2025-26 के 125 विद्यार्थियों ने 18 टीमों में भाग लेकर मानव शरीर रचना विज्ञान की गहरी समझ और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।
चिकित्सा शिक्षा में डिसेक्शन क्यों है महत्वपूर्ण
एमबीबीएस पाठ्यक्रम में डिसेक्शन को चिकित्सा प्रशिक्षण की आधारशिला माना जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी संरक्षित मानव शरीर के अंगों का प्रत्यक्ष अध्ययन करते हैं। इससे उन्हें शरीर के विभिन्न अंगों की स्थिति, नसों, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं और अंगों के आपसी संबंधों को समझने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्जरी, ईएनटी, ऑर्थोपेडिक्स और न्यूरोलॉजी जैसे विषयों में मजबूत एनाटॉमी समझ भविष्य के चिकित्सकों के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। यही कारण है कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान अब “हैंड्स-ऑन लर्निंग” मॉडल पर अधिक जोर दे रहे हैं।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और टीमवर्क विकसित करने की पहल
प्रतियोगिता का आयोजन संस्थान के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ Prof. (Dr.) Madhabananda Kar के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और सामूहिक कार्य संस्कृति विकसित करना भी था।
कार्यक्रम का समन्वयन Prof. (Dr.) Prashant Chaware तथा Dr. Kusum Gandhi ने किया। आयोजन को शरीर रचना विज्ञान विभागाध्यक्ष Prof. (Dr.) Bertha A.D. Rathinam के मार्गदर्शन में संपन्न कराया गया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के Dr. Shyam Lal और ईएनटी विभाग की Dr. Shaila Sidam ने किया।
विजेता टीमों ने प्रस्तुत किए उत्कृष्ट संरक्षित नमूने
प्रतियोगिता में विभिन्न टीमों ने मानव शरीर के संरक्षित नमूनों को वैज्ञानिक पद्धति से तैयार कर प्रस्तुत किया। मूल्यांकन में संरचना की शुद्धता, प्रस्तुतीकरण, पहचान क्षमता और तकनीकी दक्षता को प्रमुख आधार बनाया गया।
प्रथम पुरस्कार देवश्री, दीपांशु, दुदिमनी अक्षय कीर्तन, फटाले आदित्य, गुरमीत कोरी और गौतम यशस्वी की टीम को मिला।
द्वितीय स्थान आर्यमान सिंह, तिडके शिवानंद विष्णु, उद्भव मिश्रा, उन्नति गर्ग, वैभव पोरवाल, वरद नरवाडे और वेदांत लकड़े की टीम ने प्राप्त किया।
तृतीय पुरस्कार ऋषिक लाल, रितिका राठौड़, रोहित यादव, रुचिता, रुद्रप्रताप और रुद्रांश प्रियम की टीम को प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त कई टीमों को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा।
संग्रहालय में प्रदर्शित होंगे विद्यार्थियों द्वारा तैयार नमूने
प्रतियोगिता की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए चयनित नमूनों को अब शरीर रचना विज्ञान विभाग के संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाले बैचों के विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के रूप में लाभ मिलेगा और यह अकादमिक संसाधन के रूप में भी उपयोगी सिद्ध होगा।
मेडिकल शिक्षा में बढ़ रहा है प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का महत्व
देशभर के मेडिकल संस्थानों में अब पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ प्रैक्टिकल और स्किल-आधारित प्रशिक्षण पर जोर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) भी “Competency Based Medical Education” मॉडल को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें विद्यार्थी को वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों के लिए प्रारंभिक स्तर से तैयार किया जाता है।
एम्स भोपाल की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जहां विद्यार्थियों को प्रारंभिक चरण से ही क्लिनिकल सोच, अवलोकन क्षमता और सटीक शारीरिक संरचना ज्ञान विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

