भोपाल, 27 जुलाई। मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के ताजा निर्देशों के बाद नगर निगम भोपाल के उन नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति, नियमितीकरण और वेतनवृद्धि पर संकट गहरा गया है, जिन्हें अनिवार्य सीपीसीटी (CPCT) और टाइपिंग योग्यता के बिना लिपिकीय पदों पर पदोन्नत या नियमित किया गया था।
हाल ही में नगर निगम ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को पदोन्नत कर तृतीय श्रेणी के लिपिकीय पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इससे पहले भी लगभग 75 कर्मचारियों को इसी प्रकार पदोन्नति और नियमितीकरण का लाभ मिला था। अब शासन के नए निर्देशों के बाद इन सभी मामलों की समीक्षा शुरू होने की संभावना है।
तीन माह में सीपीसीटी पास करना होगा
शासन के आदेश के अनुसार, जिन कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि सीपीसीटी में छूट देकर समाप्त की गई थी, उनके परिवीक्षा समाप्ति के आदेश निरस्त किए जाएंगे। ऐसे कर्मचारियों को दोबारा परिवीक्षा अवधि में रखा जाएगा और उन्हें तीन माह के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
40 वर्ष की आयु पर भी नहीं मिलेगी छूट
सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 40 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सीपीसीटी परीक्षा से छूट का कोई प्रावधान नहीं है। विभाग के अनुसार वर्ष 1984 और 1992 के परिपत्र केवल हिंदी मुद्रलेखन (टाइपिंग) परीक्षा में छूट से संबंधित हैं। इन्हें सीपीसीटी के समान मानकर दी गई छूट नियमों के अनुरूप नहीं है।
वेतनवृद्धि भी हो सकती है निरस्त
शासन के निर्देशों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को परिवीक्षा समाप्त होने के आधार पर वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया गया है, उनकी वेतनवृद्धियां भी निरस्त की जा सकती हैं। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों का मूल वेतन उनके पद के न्यूनतम प्रारंभिक वेतन के आधार पर पुनः निर्धारित किया जाएगा।
नगर निगम भोपाल में हाल के वर्षों में हुई पदोन्नतियों और नियमितीकरण के मामलों पर इन निर्देशों का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इस संबंध में नगर निगम के अपर आयुक्त वरुण अवस्थी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
