निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 पर कांग्रेस का विरोध, महेश परमार ने सरकार से वापस लेने की मांग की

भोपाल, 23 जुलाई। मध्यप्रदेश विधानसभा में मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने विधेयक का विरोध करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करेगा और छात्रों के हितों के विपरीत है।

महेश परमार ने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक का पुरजोर विरोध करती है। उनके अनुसार, संशोधन के जरिए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित आवश्यक मानकों को शिथिल किया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इन प्रावधानों पर जताई आपत्ति

परमार ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन में 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता हटाकर “पर्याप्त भूमि” शब्द जोड़ा गया है। उन्होंने दावा किया कि इससे बहुत कम भूमि पर भी विश्वविद्यालय खोले जा सकेंगे। उन्होंने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के प्रो. यशपाल बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्याप्त परिसर विश्वविद्यालय की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है।

उन्होंने 5 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की अनिवार्यता हटाने का भी विरोध किया। उनके अनुसार यह राशि छात्रों की फीस और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थी। साथ ही उन्होंने 2,500 वर्गमीटर प्रशासनिक भवन की अनिवार्यता हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई।

शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ने का दावा

महेश परमार ने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” का अर्थ “ईज ऑफ ओपनिंग यूनिवर्सिटी” नहीं होना चाहिए और विश्वविद्यालयों को व्यावसायिक संस्थान नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में लगभग 60 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं और यदि नियमों में ढील दी गई तो भविष्य में छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार से पूछे सवाल

परमार ने सरकार से पूछा कि क्या विधेयक लाने से पहले किसी विशेषज्ञ समिति से परामर्श लिया गया, शिक्षाविदों, कुलपतियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की गई तथा उनकी रिपोर्ट उपलब्ध है या नहीं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े कुछ मुद्दे सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 गुणवत्ता आधारित शिक्षा पर जोर देती है। ऐसे में उन्होंने विधेयक को जल्दबाजी में नहीं लाने की बात कही।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस विधायक ने सरकार से मांग की कि—

मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को वापस लिया जाए।

विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति (जॉइंट सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजकर व्यापक चर्चा कराई जाए।

सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय और प्रस्तावित केंद्रीय शिक्षा कानून के बाद ही इस विषय पर आगे निर्णय लिया जाए।

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