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नेहरू की विरासत पर कांग्रेस का वैचारिक हमला: भोपाल में श्रद्धांजलि सभा बनी वर्तमान राजनीति पर बहस का मंच

Bhopal में देश के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru की पुण्यतिथि पर आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वर्तमान राजनीतिक विमर्श, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और भारत की वैचारिक दिशा पर तीखी बहस का मंच बन गया।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मौजूदा शासन व्यवस्था की तुलना औपनिवेशिक दौर से करते हुए कहा कि आज असहमतियों पर दबाव बढ़ रहा है और शासन “अंग्रेजों जैसा त्रासदायी” महसूस होने लगा है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय राजनीति में लोकतांत्रिक संस्थाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैचारिक ध्रुवीकरण पर लगातार बहस चल रही है।

नेहरू की विरासत को लेकर फिर तेज हुई वैचारिक राजनीति

भारत की राजनीति में नेहरू की विरासत हमेशा बहस का विषय रही है। एक पक्ष उन्हें आधुनिक भारत का संस्थापक मानता है, जबकि दूसरा पक्ष उनकी नीतियों की आलोचना करता रहा है।

भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने नेहरू को वैज्ञानिक सोच, संस्थागत लोकतंत्र और समावेशी राष्ट्रवाद का प्रतीक बताया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि नेहरू तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और धर्मनिरपेक्ष समाज की स्थापना चाहते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिकता किसी भी रूप में देश के लिए खतरनाक है—चाहे वह बहुसंख्यक की हो या अल्पसंख्यक की।

राजेश बादल का जिन्ना वाला दावा चर्चा में

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार Rajesh Badal रहे, जिन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री “युग पुरुष नेहरू” का प्रदर्शन किया।

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के संस्थापक Muhammad Ali Jinnah ने जीवन के अंतिम दौर में भारत आकर नेहरू से माफी मांगने और मुंबई में दफन होने की इच्छा जताई थी।

हालांकि इतिहासकारों के बीच इस दावे को लेकर स्पष्ट सर्वसम्मति उपलब्ध नहीं मानी जाती। जिन्ना के अंतिम दिनों से जुड़े कई विवरण विभिन्न पुस्तकों और संस्मरणों में अलग-अलग रूप में दर्ज हैं। इसलिए ऐसे दावों को राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों में देखा जा रहा है।

कांग्रेस का संदेश: “नेहरू मॉडल” बनाम वर्तमान राजनीति

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बार-बार “नेहरूवियन मॉडल” का उल्लेख किया। प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष Bhupendra Gupta ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद भारत ने भारी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र और वैज्ञानिक संस्थानों की नींव रखी।

उन्होंने भिलाई जैसे स्टील प्लांटों और सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की शुरुआत नेहरू काल में हुई।

यह उल्लेख महत्वपूर्ण है क्योंकि आज “आत्मनिर्भर भारत” राजनीतिक और आर्थिक विमर्श का केंद्रीय विषय बन चुका है। कांग्रेस इस बहस में यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि आत्मनिर्भरता की बुनियादी संरचना दशकों पहले तैयार की गई थी।

कार्यक्रम में संविधान और बौद्धिक विमर्श पर जोर

सभा के दौरान फिल्मकार Shyam Benegal द्वारा संविधान निर्माण पर बनाई गई श्रृंखला के एपिसोड भी प्रस्तुत किए गए। साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी के लिए पुस्तकों का योगदान दिया गया।

यह संकेत भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि कांग्रेस अब केवल चुनावी मुद्दों पर नहीं, बल्कि वैचारिक और बौद्धिक राजनीति को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है।

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