
एम्स भोपाल में वर्ल्ड थायरॉयड डे 2025 के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य थायरॉयड विकारों के प्रति समाज में समझ बढ़ाना और समय रहते इनका निदान सुनिश्चित करना रहा। यह आयोजन एम्स के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में हुआ।
थायरॉयड जांच शिविर और संवाद सत्रों का आयोजन
कार्यक्रम का नेतृत्व एंडोक्राइनोलॉजी विभाग ने किया, जिसमें जनजागरूकता वार्ताएं, रोगियों से संवाद सत्र और थायरॉयड जांच शिविर प्रमुख आकर्षण रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से हाइपोथायरॉयडिज़्म, हाइपरथायरॉयडिज़्म, गॉइटर और थायरॉयड गांठ जैसे आम विकारों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही लोगों को शिक्षित करने के लिए पुस्तिकाएं और डिजिटल जानकारी भी वितरित की गईं।
थायरॉयड: एक छुपी हुई स्वास्थ्य चुनौती
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा, “भारत में थायरॉयड विकार एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं। इसके लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समय पर पहचान नहीं हो पाती। एम्स भोपाल समय पर जांच, जनजागरूकता और चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से इस स्थिति को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक बनें और थायरॉयड संबंधी विकारों को गंभीरता से लें।”
रोकथाम और नियंत्रण के उपाय
प्रो. सिंह ने यह भी कहा कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करके थायरॉयड रोगों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
वर्ल्ड थायरॉयड डे 2025 के इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि रोगों की प्रारंभिक पहचान और सही समय पर इलाज से न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि समाज भी स्वस्थ बन सकता है। एम्स भोपाल ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनभागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।





