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विश्व पर्यावरण दिवस अभियान: रेलवे ने सफाई से आगे बढ़कर ‘ग्रीन बिहेवियर’ पर दिया जोर, इटारसी और बीना बने जागरूकता केंद्र

West Central Railway के Bhopal Railway Division में विश्व पर्यावरण दिवस अभियान के तहत चल रही गतिविधियां इस बार केवल औपचारिक सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहीं। रेलवे प्रशासन ने स्टेशनों, स्कूलों, लोको शेड और अस्पताल परिसरों में स्वच्छता, माइक्रोप्लास्टिक नियंत्रण और पर्यावरण जागरूकता को जोड़ते हुए एक व्यापक जनसंदेश देने की कोशिश की है।

Pankaj Tyagi के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान में इटारसी और बीना जैसे महत्वपूर्ण रेलवे केंद्रों पर सफाई अभियान, नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

रेलवे क्यों बदल रहा है अपनी पर्यावरण रणनीति?

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में से एक है। ऐसे में रेलवे परिसरों में उत्पन्न होने वाला प्लास्टिक कचरा, जल अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे:

प्लास्टिक बोतलों का उपयोग

खाद्य पैकेजिंग कचरा

ट्रैक प्रदूषण

जल निकासी अवरोध

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण


जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं।

इसी कारण अब रेलवे “सिर्फ सफाई” से आगे बढ़कर “पर्यावरणीय व्यवहार परिवर्तन” (Behavioural Change) पर अधिक फोकस कर रहा है।

इटारसी और बीना स्टेशन पर चला विशेष सफाई अभियान

Itarsi Junction Railway Station और Bina Junction Railway Station पर विशेष सघन स्वच्छता अभियान चलाया गया। प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, ट्रैक, यार्ड, वाटर बूथ और नालियों की सफाई की गई।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मानसून पूर्व सफाई अभियान का एक बड़ा उद्देश्य जलभराव और गंदगी से होने वाली समस्याओं को कम करना भी है। विशेष रूप से ट्रैक और ड्रेनेज सिस्टम में जमा प्लास्टिक रेलवे संचालन को प्रभावित कर सकता है।

नुक्कड़ नाटक से दिया पर्यावरण संदेश

इस अभियान का सबसे प्रभावी पक्ष छात्रों और कर्मचारियों की सहभागिता रही। West Central Railway Senior Secondary School के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “प्रदूषण को दूर करो, पर्यावरण को बचाओ” का संदेश दिया।

वहीं Diesel Loco Shed Itarsi में भी सांस्कृतिक समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर आधारित प्रस्तुति दी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार पर्यावरण अभियानों में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक गतिविधियां इसलिए प्रभावी मानी जाती हैं क्योंकि वे तकनीकी विषयों को आमजन की भाषा में समझाने का माध्यम बनती हैं। विशेष रूप से रेलवे जैसे सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे कार्यक्रम यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को प्रभावित करते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक पर रेलवे का फोकस क्यों अहम?

अभियान के दौरान वेंडरों और रेल कर्मचारियों को माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के प्रति भी जागरूक किया गया। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के वर्षों में माइक्रोप्लास्टिक वैश्विक पर्यावरण और स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभरा है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि:

प्लास्टिक कचरा छोटे कणों में टूटकर जल स्रोतों में पहुंचता है

ये कण खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकते हैं

मानव स्वास्थ्य पर इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध जारी है


रेलवे परिसरों में बड़ी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक का उपयोग होने के कारण यह क्षेत्र माइक्रोप्लास्टिक नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रेलवे स्कूलों की भूमिका भी बढ़ रही

पर्यावरण शिक्षा अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है। रेलवे स्कूलों में आयोजित गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि संस्थागत स्तर पर बच्चों को व्यवहार आधारित पर्यावरण शिक्षा देने की कोशिश हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही:

कचरा पृथक्करण

प्लास्टिक कम उपयोग

जल संरक्षण

सार्वजनिक स्वच्छता


जैसी आदतें विकसित की जाएं, तो दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव संभव हो सकता है।

रेलवे परिसरों को “ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर” में बदलने की चुनौती

भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से कार्बन उत्सर्जन कम करने, सौर ऊर्जा, जल पुनर्चक्रण और हरित स्टेशन मॉडल पर काम कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती व्यवहार परिवर्तन और नियमित रखरखाव की है।

यदि स्टेशन परिसरों में सफाई अभियान केवल “एक दिन की गतिविधि” बनकर रह जाएं, तो उनका प्रभाव सीमित हो जाता है। इसलिए अब रेलवे प्रशासन निरंतर जनभागीदारी आधारित मॉडल विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

पर्यावरण दिवस से आगे की जरूरत

विशेषज्ञ मानते हैं कि पर्यावरण संरक्षण अभियानों की वास्तविक सफलता तब होगी जब:

स्टेशन पर सिंगल यूज प्लास्टिक कम हो

कचरा पृथक्करण नियमित बने

जल निकासी तंत्र साफ रहे

यात्रियों की भागीदारी बढ़े

वेंडर पर्यावरण मानकों का पालन करें


भोपाल मंडल का यह अभियान संकेत देता है कि रेलवे अब खुद को केवल परिवहन सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि बड़े सार्वजनिक सामाजिक प्लेटफॉर्म के रूप में भी स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जा रही है।

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