
भोपाल। मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व और संरक्षित वनों में बीते दिनों हुई लगातार मौतों ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पिछले 20-25 दिनों में प्रदेश में 5 से अधिक बाघ और तेंदुओं की मृत्यु हुई है। बावजूद इसके, न तो नियमित पेट्रोलिंग का असर दिख रहा है और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो रही है।
जून 2025 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हुई चौकीदार की रहस्यमय मौत और उसी स्थान पर मिले शिकार हुए बाघ के शव ने स्थिति और भी गंभीर बना दी। यह मामला उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है।
वन विभाग का दावा है कि बाघों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि संघर्ष की स्थिति में बाघों की दहाड़ दूर तक सुनाई देती है, ऐसे में स्थानीय अमले को सूचना न मिलना गहरी लापरवाही दर्शाता है। M-Strips और मानसून पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाएं होने के बावजूद समय पर निगरानी न होना वन सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करता है।
अवैध खनन और अवैध कटाई भी इन घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। बालाघाट और सतपुड़ा में वन विभाग की ढिलाई को लेकर स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों की रक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए कठोर कार्रवाई अब समय की मांग है।





