
बक्सर। जब देश का संविधान और कानून हर अपराध, हर गलती के लिए सजा का प्रावधान करता है, तो फिर सरकारी अधिकारियों को यह अधिकार किसने दिया कि वे आम आदमी पर हाथ उठाएं? यह सवाल आज बक्सर के एक मामले को लेकर लोगों के बीच गूंज रहा है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि जब नेताओं के सामने ये अफसर चुपचाप सिर झुकाए खड़े रहते हैं, तब आम जनता के साथ इनका व्यवहार ऐसा होता है मानो ये कानून से ऊपर हों। कोई अधिकारी किसी निर्दोष नागरिक पर हाथ उठाए, यह सिर्फ अमानवीय ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की मूल आत्मा के भी खिलाफ है।
लोगों का कहना है कि ऐसा व्यवहार तानाशाही की याद दिलाता है, जहां शक्ति का इस्तेमाल सेवा के बजाय दमन के लिए किया जाता है। यह सवाल अब सिर्फ बक्सर तक सीमित नहीं रहा — यह पूरे देश की उस जनता का सवाल बन चुका है जो न्याय, सम्मान और समानता की उम्मीद करती है।





