आखिर चार दिन बाद निगम कर्मियों की हड़ताल हुई समाप्त

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ुख्यमंत्री से चर्चा करने पहुंचा था सफाई कर्मियों का प्रतिनिििध मंडल
10 मांगों को लेकर चल रही थी हड़ताल दो मांगों को किया पूरा
दैनिक वेतन भोगी होंगे विनियमित, विनियमित होंगे नियमित
दैनिक वैतन भोगी को 10,500 की जगह मिलेंगे 18000 हजार
-शहर में चार दिन की सफाईकर्मियों की हड़ताल से सडक़ों पर 2550 टन कचरा जमा
-राजधानी में सड़ता कचरा, प्रदूषित होता शहर, पर्यावरण घुलती बीमारियां
-शहर की गंदगी को लेकर पर्यावरणविद जाएंगे हाईकोर्ट
नवभारत संवाददाता
भोपाल, 6 नवंबर. राजधानी भोपाल सहित प्रदेश की सभी नगर निगम नगर पालिका और नगर परिषदों के दैनिक वैतन भोगी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल आखिर चार दिन बाद समाप्त हो गई. इस सफाई कर्मियों की हड़ताल में कंप्यूटर ऑपरेटर, क्लर्क, जलप्रदाय, अग्रिशमन,भवन अनुज्ञा, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के लगभग 1, 48 हजार कर्मचारियों ने भी समर्थन करने हुए निगम मुख्यालय सहित सभी जोन और वार्ड के कर्मचारियों ने कार्य बंद कर दिया था. हड़ताल समाप्त कराने के लिए जहां निगम आयुक्त और मंत्री कृष्णा गौर शुक्रवार को दिन में प्रयास कर चुके थे और आश्वासन भी दिया था कि मुख्यमंत्री से चर्चा कर आपकी मांगों को पूरा कराया जाएगा. उसके बाद देर शाम को सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांगों पर चर्चा हुई जिसमें प्रमुख दो मांगों पर सहमति बनी जिसमें प्रतिनिधि मंडल तैयार हो गए और मुख्यमंत्री निवास से बाहर निकलते समाप्त हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की. यह घोषणा अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने सीएम हाउस से बाहर निकलते ही मीडिया चर्चा करते हुए की. सफाई कर्मचारी संगठन ने 10 मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की थी. जिसमें से दो मांगों दैनिक वैतन भोगी को विनियमित करना और विनियमित को नियमित करना प्रमुख हैं. अब विनियमित होने के बाद 10,500 की जगह 18000 रुपए वेतन मिलने लगेगा. वहीं जो नियमित होंगे को लगभग 40000 हजार रुपए वेतन मिलेगा. इन मांगों के मंजूर होने के बाद कर्मचारियेां में जीत की खुशी देखने को मिली है. वहीं, अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने प्रदेश के सभी कर्मचारी कों समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है. वहीं सभी सफाई कर्मचारियों को रात में ही कार्य शुरु करने के लिए भी कहा गया है. क्योंकि चार दिन से शहर में हजारों टन कचरा फैला हुआ है उसे एकत्रित करना, उठाना और शहर की सफाई करने में युद्ध स्तर पर कार्य किया जाएगा. दीपावली के लिए एक दिन ही बीच में है. तो शहर की सफाई के लिए समय कम और शहर में कचरे की मात्रा चार गुना है. हड़ताल खत्म होने के बाद कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार सफाईकर्मियों के साथ 10 नंबर मार्केट पहुंचे. यहां उन्होंने सफाई अभियान चलाया. इस दौरान तीनों अधिकारियों ने भी झाड़ू लगाई.
-वीआईपी एरिया में भी कचरा ही कचरा
शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से सडक़ों पर 2550 टन कचरा जमा हो गया है, जिसका असर हर गली मोहल्ले मुख्य मार्ग बाजार सभी जगह दिखाई दे रहा है. स्थिति तो यह है कि मंत्रालय और वल्लभ भवन के आसपास कचरे का ढेर लग गया है. हर जगह डस्टबिन भरने के बाद कचरा सडक़ों पर फैल रहा है. चार इमली में कई मंत्रियों, सीनियर आईएएस और आईपीएस के बंगले हैं. इसके बावजूद हनुमान मंदिर के पास कचरे का ढेर लगा है. वहीं स्मार्ट सिटी के अटल पथ, कोलार रोड पर गेस्ट हाउस के सामने सिक्सलेन के सेंटर वर्ज में तीन दिन से कचरा जमा है. सडक़ों के किनारे कचरे के ढेर लगे हैं. कचरे के ढेर उठाने के बजाय उन्हें जलाया जा रहा. जगह-जगह कचरे में आग लगने से धुआं फैल रहा. बुधवारा बाजार में जानवरों के शव सडक़ों पर पड़े होने की भी जानकारी सामने आई है.
-जोन वार्ड कार्यालय बंद, राजस्व का नुकसान
नगर निगम की इस हड़ताल से जहां आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है. वहीं नगर निगम के स्वयं का कार्य पूरी तरह से प्रभावित है. इस हड़ताल में जहां मुख्यालय के कर्मचारी शामिल हैं. वहीं आज से जोन और वार्ड कार्यालय के कर्मचारी भी तालाबंद करके हड़ताल का समर्थन किया है. इस तालाबंदी से निगम को करोड़ो रुपए का नुकसान हुआ है. वार्ड और जोन कार्यालय में कई तरह के टेक्स जमा कराये जाते हैं. अब कार्यालय बंद होने से यह सब आय पूरी तरह से प्रभावित हुई है.
-गार्बेज स्टेशनों पर भी ताले
इस हड़ताल का असर खास तौर से अब गार्बेज स्टेशनों पर भी दिखाई दिया. शहर में छोटी कचरा वाहनों से एकत्रित कचरा शहर में स्थापित 17 गार्बेज स्टेशनों पर इकटठा किया जाता हैं. जहां से बड़े केप्सूल के माध्यम से खंती तक पहुंचाया जाता है. अब वहां पर कार्यरत सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो अब कचरा सडक़ों पर ही दिखाई दे रहा है वहीं सभी कचरा वाहन इन सभी गार्बेज स्टेशनों खड़े हुए है.
-शहर के कई इलाकों में नहीं हुआ जलप्रदाय
निगम में पहले सिर्फ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हुई थी लेकिन जैसे जैसे हड़ताल आगे बढ़ती गई और निगम के अन्य शाखा के कर्मचारी इसमें शामिल होते गए. गुरुवार सभी जलकार्य शाखा के कार्यरत कर्मचारी ने भी समर्थन करते हुए हुए. इन कर्मचारियों ने पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी. इसके बाद शुक्रवार को कुछ क्षेत्रों में पानी बंद रहा कुछ में जारी. जहां टेंकरों से सप्लाई हो रहा था वह भी बंद कर दिया गया. जिस के चलते गरीब बस्तियों में पानी की परेशानी खड़ी हो गई.
-सड़ते कचरे से संक्रमण और बीमारियों का जोखिम : पर्यावरणविद
शहर में चार दिन से सफाई व्यवस्था चौपट है. जिससे शहर का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है. इस मामले में पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे से बात की गई तो उन्होने बताया कि इस हड़ताल ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी है. शहर के अधिकतर क्षेत्रों में जनता और व्यापारी कचरे के ढेर में आग लगा रहे हैं. शहर में मछली और मीट बाजार में सफाई नहीं होने से सड़ते अवशेषों से बदबू फैल रही है. इससे एक तरफ कचरा जलने से हवा प्रदूषित होने का खतरा है, तो दूसरी तरफ बढ़ रहा है. इस बदहाल स्थिति को अब सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जाएगा. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामले के याचिकाकर्ता पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने कहा है कि वे 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले शहर के हालात की तस्वीरें और मीडिया रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे. उनका आरोप है कि कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपने के बावजूद जमीन पर कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि व्यवस्था में तेजी से सुधार हो सके. इसके बावजूद शहर में कचरा सडक़ों पर जमा है और लोग उसे जला रहे हैं. उन्होंने कहा कि 17 नवंबर की सुनवाई से पहले वे इन हालात की तस्वीरें और मीडिया कवरेज कोर्ट में पेश करेंगे. साथ ही कलेक्टर की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाएंगे.
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फोटो: रजिस्ट्री
संपत्ति का कारोबार पहूंचा 12 करोड़
668 प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियां हुईं, 13 करोड़ का राजस्व आया
– आईएसबीटी, परी बाजार व बैरसिया में रजिस्ट्री कराने वालों की उमड़ी भीड़
नवभारत संवाददाता
भोपाल, 6 नवंबर. राजधानी में संपत्तियों की खरीदी में भी धनतेरस पर उछाल दिखाई दिया, ङ्क्षजले में लगभग 12 करोड़ रुपए की संपत्तियों का करोबार हुआ. आम दिनों की अपेक्षा तीन गुनी रजिट्रियां होने से 13 करोड़ रुपये का राजस्व आया. धनतेरस को देखते हुए लोगों को रजिस्ट्रियां कराने के लिए स्लॉट दिए गए थे. साथ ही 11 सब रजिस्ट्रारों सहित कर्मचारियों को रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने में लगाया गया था. स्लॉट के अनुसार जैसे ही लोगों के नंबर आ रहे थे, वैसे-वैसे लोग रजिस्ट्री करा रहे थे. बीच-बीच में कभी-कभार सर्वर धीमा चलने से थोड़ी-बहुत दिक्कतें आईं, लेकिन रजिस्ट्री करने की प्रक्रिया चलती रही. लोगों ने प्लॉट, फ्लैट, मकान, दुकानों, खेती की जमीन की रजिस्ट्रियां कराईं. यह कारोबार जिले में तीन पंजीयक कार्यालय आईएसबीटी, परी बाजार व बैरसिया हुआ है. इन सभी रजिस्ट्री कार्यालयों पर धनतेरस, दीपावली के शुभ मुहूर्तों में खरीदी गईं सपंत्तियों की रजिस्ट्री कराने लोग पहुंचे. इससे तीनों कार्यालयों में लोगों की भीड़ रही.

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