पहलगाम आतंकी हमले पर सरकार की मंशा पर उठे सवाल, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ रिपोर्ट से खुला बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार को इस हमले की पूर्व सूचना थी, इसके बावजूद हमला हो जाना गंभीर लापरवाही या राजनीतिक साज़िश की ओर इशारा करता है।
पहलगाम आतंकी हमला, जिसमें निर्दोषों की जान गई, ने पुलवामा हमले की यादें ताजा कर दी हैं। अब सवाल यह है कि जब पूर्व खुफिया सूचना उपलब्ध थी, तो सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई? क्यों सीआरपीएफ को उस संवेदनशील क्षेत्र से हटाया गया?
राजनीतिक विश्लेषक और सोशल मीडिया पर सक्रिय नागरिकों का कहना है कि यह केवल सरकारी विफलता नहीं, बल्कि एक संभावित सुनियोजित चूक भी हो सकती है, जिससे सरकार को राजनीतिक लाभ हो। कई लोगों ने पुलवामा अटैक के समय जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि अब उन्हें फिर से सामने लाकर पूछताछ की जानी चाहिए।
सरकार की प्राथमिकता में जनता नहीं, राजनीति?
हमले के बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का कश्मीर की बजाय चुनावी दौरे पर बिहार जाना, और फिर धर्म आधारित राजनीति से ध्यान भटकाना, यह संकेत देता है कि सरकार का उद्देश्य सुरक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ है।
सीआरपीएफ को जानबूझकर हटाना?
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार ने पहले से चेतावनी के बावजूद सुरक्षा बलों को हटाकर जानबूझकर रास्ता साफ किया, ताकि हमला हो और उसके बाद राष्ट्रीय भावनाओं को उकसाकर राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
अगर अब भी देश की जनता इन सवालों को गंभीरता से नहीं लेती, तो यह भविष्य में और भी गंभीर संकटों को न्योता देना होगा।
क्या पहलगाम हमला ‘हो गया’ या ‘होने दिया गया’?
यह सबसे बड़ा सवाल है, और अब देश को चाहिए कि सत्यपाल मलिक जैसे गवाहों से दोबारा पूछताछ कर सच्चाई सामने लाई जाए।
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