जे.पी. अस्पताल भोपाल में 20-25 वर्षों से कार्यरत आरकेएस कर्मचारियों को सेवामुक्त करने पर उठे सवाल

भोपाल। जयप्रकाश (जे.पी.) चिकित्सालय, भोपाल में रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के माध्यम से पिछले 20 से 25 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को अचानक सेवामुक्त किए जाने का मामला सामने आया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के वर्ष 2019 के आदेश की गलत व्याख्या कर उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं।
कर्मचारियों के अनुसार सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जयप्रकाश चिकित्सालय द्वारा 22 जुलाई 2026 को जारी पत्र क्रमांक 461 के माध्यम से उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। उनका कहना है कि वे वर्षों से अस्पताल में निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्यरत रहे हैं तथा कोविड-19 महामारी जैसे कठिन दौर में भी अपनी सेवाएं लगातार देते रहे।
कर्मचारियों का दावा है कि सेवा समाप्ति के आदेश में संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के पत्र क्रमांक अ.प्र./रो.क.स./2019/1073, दिनांक 18 जुलाई 2019 का हवाला दिया गया है। उनका कहना है कि उक्त आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि आदेश जारी होने के बाद रोगी कल्याण समिति द्वारा सीधे संविदा या अन्य किसी माध्यम से नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी। कर्मचारियों का आरोप है कि इस आदेश को पूर्व में नियुक्त कर्मचारियों पर लागू कर उनकी सेवाएं समाप्त करना नियमों की गलत व्याख्या है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्तियां वर्ष 2019 से कई वर्ष पहले तत्कालीन नियमों एवं कलेक्टर दर के प्रावधानों के तहत हुई थीं। उस समय आउटसोर्स व्यवस्था अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में वर्ष 2019 के आदेश को भूतलक्षी (रेट्रोस्पेक्टिव) प्रभाव से लागू कर 20-25 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को हटाना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सेवा समाप्त करने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कर्मचारियों के अनुसार 22 जुलाई को बैठक आयोजित कर उसी दिन उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय ले लिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 20 से 25 वर्ष इस अस्पताल की सेवा में समर्पित किए हैं। अचानक सेवामुक्त किए जाने से उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शासन से सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार कर न्याय दिलाने और उनकी सेवाएं बहाल करने की मांग की है।
(नोट: यह कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप एवं उनकी ओर से प्रस्तुत पक्ष है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)





