अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर बढ़ा विरोध, लिपिक संघ ने सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की

भोपाल। अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के लिए सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा की अनिवार्यता और इसके आधार पर सेवा समाप्ति के मामलों को लेकर मध्यप्रदेश में कर्मचारी संगठनों का विरोध तेज हो गया है। मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और वर्तमान नियमों में संशोधन किया जाए।
संघ का तर्क है कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य दिवंगत शासकीय सेवक के परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यदि ऐसे कर्मचारियों को तकनीकी योग्यता या परीक्षा में असफलता के आधार पर सेवा से पृथक किया जाता है, तो योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है।
क्या है अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य?
अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था उन परिवारों के लिए बनाई गई है जिनके किसी सदस्य की शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। ऐसी स्थिति में परिवार के एक पात्र आश्रित को नौकरी देकर परिवार के भरण-पोषण और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले कई कर्मचारी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर होती है। नौकरी समाप्त होने की स्थिति में न केवल दिवंगत कर्मचारी के माता-पिता, भाई-बहन प्रभावित होते हैं, बल्कि अनुकंपा नियुक्त कर्मचारी के अपने परिवार, बच्चों और आश्रितों के सामने भी गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
सीपीसीटी परीक्षा को लेकर उठ रहे सवाल
संघ के अनुसार सीपीसीटी परीक्षा में कंप्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थी भी शामिल होते हैं, जिसके कारण परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कई अनुकंपा नियुक्त कर्मचारी केवल 12वीं या स्नातक स्तर की सामान्य शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए तकनीकी प्रकृति की परीक्षा पास करना कठिन साबित हो सकता है, जबकि वे वर्षों से विभागीय कार्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
विभागीय कार्यों में पहले से दक्ष होने का दावा
संघ का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विभिन्न विभागों में—
वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (FMIS)
ई-फाइलिंग
ऑनलाइन डेटा प्रबंधन
स्थापना संबंधी कार्य
लेखा एवं भंडार
ऑडिट
बजट कार्य
विधानसभा प्रश्न
सीएम हेल्पलाइन
सूचना का अधिकार (RTI)
जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में केवल सीपीसीटी योग्यता के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।
संघ ने रखीं प्रमुख मांगें
मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के लिए सीपीसीटी की अनिवार्यता में राहत।
40 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले कर्मचारियों को सीपीसीटी से छूट।
सीपीसीटी के स्थान पर विशेष प्रशिक्षण के बाद विभागीय परीक्षा की व्यवस्था।
सेवा समाप्ति से संबंधित प्रावधानों को समाप्त करने की मांग।
सीपीसीटी के कारण सेवा से पृथक किए गए कर्मचारियों की पुनर्बहाली।
शामिल हैं।
सतपुड़ा भवन के सामने ज्ञापन और प्रदर्शन
इन मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन द्वारा भोपाल में सतपुड़ा भवन के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। संगठन का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों के रोजगार का प्रश्न नहीं, बल्कि उन परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का विषय है जो अनुकंपा नियुक्ति पर निर्भर हैं।
सरकार के सामने संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा दो महत्वपूर्ण पक्षों से जुड़ा है। एक ओर प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल दक्षता और कंप्यूटर कौशल सुनिश्चित करना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर अनुकंपा नियुक्ति की सामाजिक संवेदनशीलता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों की कार्यक्षमता और तकनीकी योग्यता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन परिवारों के हितों की भी रक्षा की जाए, जिनके लिए अनुकंपा नियुक्ति जीवनयापन का प्रमुख आधार है।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों की मांगों और सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर हजारों अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं।



