सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार, 303 मास्टर ट्रेनर्स पूरे प्रदेश में दे रहे प्रशिक्षण

भोपाल, 24 जुलाई। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति देने के लिए शुक्रवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में “सिंहस्थ-2028 : ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT)” का राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में प्रदेशभर के मास्टर ट्रेनर्स, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रशिक्षण व्यवस्था की समीक्षा और आगामी रणनीति पर चर्चा की।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि सिंहस्थ-2028 केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम है। इसकी सफलता के लिए प्रशिक्षित पुलिस बल, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस पिछले तीन वर्षों से चरणबद्ध तरीके से तैयारियां कर रही है।
डीजीपी ने बताया कि दो चरणों में आयोजित ToT कार्यक्रमों के माध्यम से 303 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं, जो अपने-अपने जिलों में हजारों पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भूमिका आधारित प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय का eHRMS अंतिम चरण में है, जिससे सिंहस्थ के दौरान पुलिस बल की ड्यूटी, तैनाती और मानव संसाधन प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ-2025 से मिले अनुभवों को भी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में शामिल किया गया है। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 में 8,500 और वर्ष 2026 में 9,662 पुलिस पदों पर भर्ती की स्वीकृति मिल चुकी है। इससे लगभग 18 हजार नए प्रशिक्षित पुलिसकर्मी भविष्य में सिंहस्थ और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध होंगे।
सेमिनार में उत्तर प्रदेश रेलवे पुलिस के महानिदेशक डी. प्रकाश ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के अनुभव साझा करते हुए होल्डिंग एरिया, वन-वे मूवमेंट, कलर कोडिंग और मजबूत संचार व्यवस्था जैसी सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को अपनाने का सुझाव दिया।
विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन ने सेवा भावना और संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि सिंहस्थ में ड्यूटी केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर है। वहीं उत्तर प्रदेश की महानिदेशक रेणुका मिश्रा ने “Police Service, Not Police Force” की अवधारणा पर बल देते हुए श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
दोपहर बाद आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण में नवाचार, तकनीक के उपयोग, व्यवहारिक अभ्यास और जिलों से प्राप्त फीडबैक पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में सिंहस्थ-2028 की आगामी प्रशिक्षण कार्ययोजना प्रस्तुत की गई और सभी प्रतिभागियों ने आयोजन को सुरक्षित, तकनीक-सक्षम और सुव्यवस्थित बनाने का संकल्प दोहराया।





