नाबालिग बच्ची से छेड़छाड़ मामले में आरोपी को 5 वर्ष का सश्रम कारावास, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला

भोपाल। नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ और गलत नीयत से स्पर्श करने के मामले में भोपाल की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर आर्थिक दंड भी लगाया है।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने आरोपी पूरन सिंह आदिवासी को पॉक्सो एक्ट की धारा 9एम/10 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 के तहत दोषसिद्ध पाया।

पॉक्सो एक्ट में 5 वर्ष की सजा

न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 9एम/10 के तहत आरोपी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं बीएनएस की धारा 74 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक और ने पैरवी की।

दुकान पर सामान लेने गई बच्ची के साथ हुई घटना

अभियोजन के अनुसार घटना 7 मई 2025 की है। अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग बच्ची को उसकी मां ने घर के पास स्थित दुकान से सामान लेने भेजा था।

कुछ समय बाद बच्ची रोते हुए घर लौटी। पूछताछ करने पर उसने बताया कि दुकान पर मौजूद व्यक्ति ने उसे पैसे दिखाकर अपने पास बुलाने की कोशिश की, उसका हाथ पकड़ा और गलत तरीके से स्पर्श किया। बच्ची ने यह बात अपने माता-पिता को बताई।

परिजनों ने आरोपी की तलाश की और बाद में बच्ची से पहचान कराई। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस जांच के बाद न्यायालय में पहुंचा मामला

सूचना के आधार पर में अपराध क्रमांक 208/2025 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और तर्क प्रस्तुत किए।

न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी को दोषी माना और सजा सुनाई।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर न्यायालय का स्पष्ट संदेश

पॉक्सो एक्ट के मामलों में अदालतें बच्चों की सुरक्षा और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में समय पर शिकायत, प्रभावी पुलिस जांच और मजबूत अभियोजन व्यवस्था पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह फैसला बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कानून की सख्ती और दोषियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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