धार्मिक आयोजनों से समाज में शांति, सद्भाव और संस्कारों का होता है विस्तार : गोविंद सिंह राजपूत

राहतगढ़ में सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए खाद्य मंत्री, जैन धर्म के मूल्यों को बताया मानवता के लिए प्रासंगिक
भोपाल/राहतगढ़। मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने राहतगढ़ में आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में शामिल होकर पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज में शांति, सद्भाव, नैतिकता और संस्कारों के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
राहतगढ़ में 25 मई से 3 जून तक आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। मंत्री राजपूत ने आयोजन समिति, जैन समाज और क्षेत्रवासियों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
राहतगढ़ बन रहा आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र
मंत्री ने कहा कि राहतगढ़ क्षेत्र में लगातार हो रहे धार्मिक आयोजनों ने नगर को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है। जैन समाज के प्रयासों और संतों के मार्गदर्शन से यह क्षेत्र अध्यात्म और धार्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से जुड़े आचार्य धीरज जी ने अपने ज्ञान, प्रवचनों और आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से देश-विदेश में धर्म की पताका फहराई है, जिससे पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा है।
जैन धर्म के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक
अपने संबोधन में मंत्री राजपूत ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा, सत्य, करुणा, अपरिग्रह और आत्मसंयम का संदेश देता है। तीर्थंकरों और जैनाचार्यों की शिक्षाएं मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और सदाचार का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जैन दर्शन के सिद्धांत लोगों को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व शांति महायज्ञ और सिद्धचक्र महामंडल विधान जैसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार का सशक्त माध्यम भी हैं।
सिद्धचक्र महामंडल विधान का आध्यात्मिक महत्व
खाद्य मंत्री ने बताया कि जैन परंपरा में सिद्धचक्र महामंडल विधान को अत्यंत पुण्यदायी और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। यह आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस विधान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाने तथा धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, सहयोग और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करते हैं। साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
श्रद्धालुओं से सराबोर हुआ राहतगढ़
आयोजन स्थल पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचकर पूजन, विधान, महायज्ञ और धार्मिक प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं। पूरा राहतगढ़ नगर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर दिखाई दे रहा है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन, आवास, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है।



