मध्यप्रदेश में कृषि को नई दिशा: उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्य संवर्धन आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़ेंगे किसान

प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और एग्री-प्रोसेसिंग पर सरकार का फोकस; भोपाल-नर्मदापुरम संभाग के लिए तैयार हुआ कृषि विकास रोडमैप

भोपाल, 15 जून 2026। मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को केवल उत्पादन केंद्रित व्यवस्था से निकालकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भंडारण और बाजार आधारित कृषि अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने कहा कि आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेत से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी है।

भोपाल स्थित नर्मदा भवन में आयोजित भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग की रबी वर्ष 2025-26 की समीक्षा और खरीफ वर्ष 2026 की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभागों की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में दोनों संभागों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कृषि को बनाया जाएगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि विकास की रणनीति प्रत्येक जिले की जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ना होगा, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि व्यवस्था में उच्च मूल्य वाली फसलें, वैज्ञानिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रमुख माध्यम बन सकते हैं।

उद्यानिकी को व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर

बैठक में उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि उद्यानिकी अब केवल पारंपरिक खेती की सहायक गतिविधि नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए एक मजबूत व्यावसायिक अवसर बन सकती है।

उन्होंने जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार क्लस्टर आधारित उद्यानिकी विकास, उच्च मूल्य वाली फसलों, औषधीय पौधों, पुष्प उत्पादन और बाजार आधारित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

बैठक में मखाना उत्पादन, नदी किनारे तरबूज एवं खरबूज की खेती, टमाटर उत्पादन, औषधीय फसलों और व्यावसायिक फूलों की खेती जैसे नवाचारों की जानकारी भी साझा की गई।

कोल्ड चेन और खाद्य प्रसंस्करण से मिलेगा किसानों को बेहतर मूल्य

कृषि उत्पादों के बेहतर प्रबंधन के लिए शेडनेट हाउस, प्री-कूलिंग यूनिट, राइपनिंग चैंबर, कोल्ड चेन, रेफ्रिजरेटेड परिवहन और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिल सके।

प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण को मिलेगी प्राथमिकता

बैठक में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और फसल विविधीकरण को कृषि विकास की प्रमुख रणनीति बताया गया।

अधिकारियों से कहा गया कि कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीकों की जानकारी पहुंचाई जाए। किसानों को बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं के अनुरूप कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।

सहकारिता और पैक्स के माध्यम से मजबूत होगा कृषि तंत्र

सहकारिता क्षेत्र की समीक्षा करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि सहकारी संस्थाएं किसानों को कम लागत पर कृषि सामग्री, ऋण सुविधा, आधुनिक कृषि यंत्र, सामूहिक विपणन और प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी. आहूजा ने उर्वरकों की सुचारू उपलब्धता, पुराने सदस्यों को पुनः समितियों से जोड़ने और पैक्स सदस्यता अभियान को गति देने के निर्देश दिए। 30 जून तक अधिकतम किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

डेयरी और पशुपालन से बढ़ेंगे ग्रामीण आय के अवसर

बैठक में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

‘क्षीरधारा’ जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने की रणनीति पर चर्चा हुई।

मत्स्य पालन में केज कल्चर और आधुनिक तकनीक पर जोर

मत्स्य पालन क्षेत्र की समीक्षा में जलाशयों के बेहतर उपयोग, केज कल्चर (Cage Culture) को बढ़ावा देने, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध कराने और मत्स्य उत्पादों के प्रसंस्करण एवं विपणन तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों ने कहा कि मत्स्य पालन को ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा।

खरीफ सीजन के लिए तैयारियों की समीक्षा

खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर कृषि उत्पादन आयुक्त ने उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, फसल बीमा कवरेज और कृषि सेवाओं के विस्तार की समीक्षा की।

उन्होंने नकली एवं अवैध उर्वरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिक से अधिक किसानों को शामिल करने और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

नरवाई प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे उपकरणों के उपयोग को बढ़ाने तथा कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

डिजिटल कृषि सेवाओं से किसानों तक पहुंचेगी समय पर जानकारी

किसान हित में मानसून ऐप, दामिनी ऐप और मेघदूत ऐप जैसी डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इन माध्यमों से किसानों को मौसम, कीट प्रबंधन, सिंचाई और कृषि तकनीक संबंधी समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

आत्मनिर्भर कृषि तंत्र बनाने का लक्ष्य

बैठक के समापन पर कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसा कृषि तंत्र विकसित करना लक्ष्य है, जिसमें किसान केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं बल्कि मूल्य संवर्धन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सक्रिय भागीदार बनें।

उन्होंने उप संचालक कृषि और उद्यानिकी अधिकारियों को प्रगतिशील किसानों को राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों एवं कृषि प्रयोगशालाओं के अध्ययन भ्रमण कराने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश में आधुनिक, तकनीक आधारित और आत्मनिर्भर कृषि मॉडल को मजबूत किया जा सके।

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