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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी गारंटी : गोविंद सिंह राजपूत

भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला में बोले खाद्य मंत्री— सरकार का लक्ष्य, कोई पात्र परिवार खाद्यान्न से वंचित न रहे और कोई भूखा न सोए

भोपाल। मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) केवल खाद्यान्न वितरण की योजना नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देने वाला सामाजिक न्याय का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “गरीब कल्याण” के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न के अधिकार से वंचित न रहे और कोई भूखा न सोए।

भोपाल के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में राज्य खाद्य आयोग और नीति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री राजपूत ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में व्यापक तकनीकी सुधार किए गए हैं। अब राशन वितरण की पूरी प्रक्रिया पीओएस मशीनों, ई-केवाईसी, डिजिटल वितरण और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से जुड़ी है। साथ ही राशन की जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में बुजुर्ग और दिव्यांग उपभोक्ता अपनी ओर से किसी भी व्यक्ति को खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं। वहीं ‘आपका राशन-आपके द्वार’ योजना के तहत राशन वाहन गांवों तक पहुंचकर पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध करा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि विकसित मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक को भोजन, पोषण और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार सुनिश्चित होगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सक्रिय सहयोग की अपील की।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि खाद्य विभाग के अधिकारियों की एक टीम अन्य राज्यों की उत्कृष्ट सार्वजनिक वितरण प्रणालियों का अध्ययन करेगी। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनहितैषी बनाया जाएगा।

कार्यशाला में राज्य खाद्य आयोग के सचिव श्रीमन शुक्ला, नीति आयोग के पूर्व सदस्य एवं अर्थशास्त्री प्रो. रमेशचंद्र, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. वीरेन्द्र कुमार मल्होत्रा, खाद्य आयुक्त भास्कर लक्षकार सहित विभिन्न राज्यों के खाद्य आयोगों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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