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मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई, राजगढ़ में ₹2.24 लाख लौटाए, नर्मदापुरम में अंतर्राज्यीय ठग गिरफ्तार

भोपाल, 23 जुलाई। मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजगढ़ और नर्मदापुरम में अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। राजगढ़ पुलिस ने दो साइबर ठगी मामलों में ₹2.24 लाख की पूरी राशि पीड़ितों को वापस दिलाई, जबकि नर्मदापुरम पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगे ₹60 हजार वापस

राजगढ़ जिले में साइबर ठगों ने एक ऑटो चालक को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ₹60 हजार की ठगी की थी। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर अश्लील वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाया और कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवा लिए।

पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मामले में एक विधि-विरुद्ध बालक को भी चिन्हित किया गया है। पीड़ित की पूरी राशि वापस दिला दी गई।

ऑनलाइन निवेश के नाम पर ₹1.64 लाख की ठगी भी लौटाई

राजगढ़ के ही एक अन्य मामले में शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर ₹1.64 लाख की साइबर ठगी की गई थी। आरोपी ने पीड़ित के डीमैट अकाउंट का एक्सेस हासिल कर धोखाधड़ी की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरी राशि वापस कराई और राजस्थान निवासी आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की।

नर्मदापुरम में अंतर्राज्यीय गिरोह के आरोपी गिरफ्तार

नर्मदापुरम जिले के देहात थाना क्षेत्र में एक महिला से कस्टमर केयर फ्रॉड के जरिए ₹99 हजार की ठगी की गई थी। आरोपियों ने खुद को ZODIAC कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर कपड़ों की बुकिंग राशि लौटाने का झांसा दिया और बैंक खाते से पैसे निकाल लिए।

तकनीकी साक्ष्यों, बैंक ट्रांजेक्शन और साइबर सेल की मदद से पुलिस ने केरल और महाराष्ट्र में कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले की आगे की जांच जारी है।

समय पर शिकायत से बढ़ती है राशि वापस मिलने की संभावना

मध्यप्रदेश पुलिस ने बताया कि इन मामलों में जिला पुलिस, साइबर सेल, बैंकिंग संस्थानों और अन्य एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय के कारण कार्रवाई सफल रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर गोल्डन ऑवर के भीतर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि होल्ड और रिकवर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया भारत में नहीं है। किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस, सीबीआई, ईडी, बैंक अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने पर सतर्क रहें और अपनी ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, बैंक या डीमैट खाते की गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।

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