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सीपीसीटी नियमों के विपरीत पदोन्नति पर विवाद, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय को कार्रवाई का पत्र

भोपाल, 23 जुलाई। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर दी गई पदोन्नति को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उसे निरस्त करने और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव रवि मालवीय ने अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग तथा सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र जारी कर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

पत्र में शिकायत का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने अपने आदेश क्रमांक प्रशासन/स्थापना/2026/591 में सामान्य प्रशासन विभाग के 26 मई 2026 के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कर्मचारियों को इस शर्त पर पदोन्नति प्रदान की कि वे दो वर्ष के भीतर सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा उत्तीर्ण कर लेंगे।

नियमों का दिया गया हवाला

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग के 12 जून 2009 के परिपत्र के अनुसार सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति या पदोन्नति के लिए हिंदी टाइपिंग परीक्षा तथा मान्यता प्राप्त संस्था से कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य था। इसके बाद 31 अगस्त 2010 के परिपत्र के माध्यम से पदोन्नत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा से छूट दी गई।

बाद में 1 मई 2013 से कंप्यूटर टाइपिंग दक्षता प्रमाण-पत्र और 26 फरवरी 2015 से सीपीसीटी स्कोर कार्ड अनिवार्य कर दिया गया।

सीपीसीटी में छूट का प्रावधान नहीं

शिकायत में कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के 26 मई 2026 के स्पष्टीकरण में स्पष्ट किया गया है कि हिंदी टाइपिंग परीक्षा और सीपीसीटी परीक्षा अलग-अलग अर्हताएं हैं तथा सीपीसीटी परीक्षा से किसी प्रकार की छूट का कोई प्रावधान नहीं है।

इसी आधार पर आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय ने प्रचलित नियमों के विपरीत कर्मचारियों को भविष्य में सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त पर पदोन्नति दे दी, जो विभागीय निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

पदोन्नति आदेश निरस्त करने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने राज्य शासन से मांग की है कि 10 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश तत्काल निरस्त किया जाए तथा आदेश जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

> नोट: यह मामला शिकायत और विभागीय पत्राचार पर आधारित है। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच और कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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