एम्स भोपाल में आठवीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन, देशभर के मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा; दस राउंड में परखी गई फॉरेंसिक मेडिसिन की समझ
भोपाल। एम्स भोपाल में फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की ओर से आठवीं राष्ट्रीय ऑटोप्सी क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें देशभर के मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। दस राउंड तक चली प्रतियोगिता में श्याम शाह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की टीम ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि एम्स भोपाल की टीम उपविजेता रही।
यह प्रतियोगिता वर्ष 2015 में मेडिकोलीगल एक्सपर्ट एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश के तत्वावधान में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य मेडिकल विद्यार्थियों को फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी का सैद्धांतिक ज्ञान देने के साथ उनकी व्यावहारिक समझ और दक्षता बढ़ाना है।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं स्नातक चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों में शैक्षणिक उत्कृष्टता विकसित करने में मददगार हैं।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम का नेतृत्व आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरनीत अरोड़ा ने किया। आयोजन सचिव डॉ. राघवेंद्र कुमार विदुआ तथा सह-आयोजन सचिव डॉ. जयंती यादव, डॉ. अतुल केचे और डॉ. निरंजन साहू ने व्यवस्थाएं संभालीं। इस अवसर पर विशेषज्ञ डॉ. बीपी दुबे, डॉ. डीएस बड़कर और डॉ. डीके सत्पथी भी मौजूद रहे।
डॉ. डीके सत्पथी ने अपने व्याख्यान में बताया कि फॉरेंसिक मेडिसिन का महत्व केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के चिकित्सा अभ्यास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
प्रतियोगिता के दस राउंड का संचालन पांच क्विज मास्टरों ने किया। प्रत्येक ने दो-दो राउंड लिए। विजेता, उपविजेता और ऑडियंस राउंड के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र, पदक और चिकित्सा विषयों की पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार एम्स भोपाल के डीन (अकादमिक) डॉ. रजनीश जोशी ने प्रदान किए।
