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ICJS से मजबूत होगा आपराधिक न्याय तंत्र, भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यशाला में पुलिस, न्यायपालिका और अन्य विभागों ने साझा किया रोडमैप

भोपाल, 28 जून ।
देश में तेजी से बदलते अपराध के स्वरूप और डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका के बीच मध्यप्रदेश ने आपराधिक न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल), भोपाल में “ICJS Implementation and Digital Integration” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभाग सहित आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी प्रमुख स्तंभों के वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर आए। उद्देश्य था कि इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से सभी विभागों के बीच डिजिटल समन्वय को मजबूत किया जाए और न्याय प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सके।

तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था की दिशा में अहम पहल

कार्यशाला का शुभारंभ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, SCRB जयदीप प्रसाद के नेतृत्व और पुलिस महानिरीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र के समन्वय में किया गया।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि ICJS केवल एक सॉफ्टवेयर परियोजना नहीं है, बल्कि देश की पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल रूप से जोड़ने वाला राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभागों के बीच निर्बाध डिजिटल डेटा साझा व्यवस्था समय की आवश्यकता है।

डिजिटल साक्ष्य और रियल टाइम डेटा बनेगा न्याय व्यवस्था का आधार

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर ने कहा कि ICJS एक तकनीकी मंच से आगे बढ़कर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीक को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भविष्य की न्याय व्यवस्था डिजिटल साक्ष्यों, सुरक्षित डेटा प्रबंधन और रियल टाइम सूचना आदान-प्रदान पर आधारित होगी।

उन्होंने मध्यप्रदेश में ई-समन, ई-वारंट, CCTNS आधारित समन्वय और डिजिटल संचार जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब इसका लाभ आम नागरिक तक पहुंचे।

न्यायमूर्ति कालगांवकर ने डिजिटल चार्जशीट, सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज, दस्तावेजों की बेहतर इंडेक्सिंग और पुलिस, न्यायालय एवं जेल प्रणालियों के बीच बेहतर डेटा एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि CCTNS 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें भविष्य की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाएंगी।

नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाना मुख्य लक्ष्य: गृह विभाग

अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय शुक्ला ने कहा कि सूचना एवं संचार तकनीक के उपयोग में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन विभागों के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि राज्य शासन संबंधित विभागों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना पर काम कर रहा है और भारत सरकार, NIC सहित अन्य संस्थाओं के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल तकनीकी रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है।

साइबर और संगठित अपराधों से निपटने में ICJS महत्वपूर्ण: डीजीपी

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग जरूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए वैज्ञानिक विवेचना, डिजिटल साक्ष्य और विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल टाइम सूचना साझा करना बेहद महत्वपूर्ण है।

डीजीपी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस डिजिटल पुलिसिंग को तेजी से अपना रही है। विवेचना अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं और e-Sakshya, NAFIS, CCTNS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जांच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

उन्होंने डेटा गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता और विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को मिले पुरस्कार

कार्यशाला में जून 2025 से मई 2026 तक CCTNS डेटा गुणवत्ता और डेटा एंट्री के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया।

CCTNS डेटा रैंकिंग में:

– रतलाम जिले ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
– अशोकनगर और गुना संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे।
– राजगढ़ जिले ने तृतीय स्थान हासिल किया।

इसके अलावा फिंगरप्रिंट प्रबंधन और पहचान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भोपाल कमिश्नरेट, देवास और इंदौर को भी सम्मानित किया गया।

विशेषज्ञों ने साझा किए डिजिटल न्याय व्यवस्था के अनुभव

तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के उप निदेशक प्रसून गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश ICJS और CCTNS के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी राज्यों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि ICJS 2.0 का उद्देश्य “वन कंट्री, वन डेटा, वन एंट्री” की दिशा में आगे बढ़ते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी स्तंभों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।

मुंबई के विशेषज्ञ डॉ. सैयद शफीक महदी रिजवी ने डिजिटल फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की न्यायिक उपयोगिता पर जानकारी दी।

विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया।

ICJS रोडमैप 2026-27 पर हुआ मंथन

कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र में ICJS रोडमैप 2026-27 प्रस्तुत किया गया। इंदौर कमिश्नरेट, देवास और रतलाम पुलिस टीमों ने डिजिटल इंटीग्रेशन के क्षेत्र में किए गए नवाचार और सफलता की कहानियां साझा कीं।

समापन सत्र में समूह चर्चा के माध्यम से अधिकारियों और विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए। इन सुझावों के आधार पर ICJS के प्रभावी क्रियान्वयन की आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।

कार्यशाला ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था में तकनीक, डेटा और विभागों के बीच बेहतर तालमेल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

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