
भोपाल, 31 मई। कोलार रोड स्थित वार्ड क्रमांक 82 राजधानी के तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां आधुनिक टाउनशिप, बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं, पॉश कॉलोनियां और झुग्गी बस्तियां एक साथ मौजूद हैं। लेकिन विकास के दावों के बीच क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी हैं। पेयजल आपूर्ति, सीवेज व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और नालों की सफाई जैसे मुद्दे आज भी हजारों रहवासियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
मानसून की दस्तक के साथ ही स्थानीय नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नालों और सीवेज लाइनों की सफाई नहीं हुई तो कई कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
विकसित कॉलोनियों के बीच बुनियादी सुविधाओं का संकट
वार्ड 82 में गुड शेफर्ड, बंजारी सी सेक्टर, बीमा कुंज, सर्वधर्म कॉलोनी, जेके टाउन, गणपति इन्क्लेव, मंदाकिनी, शिरडीपुरम, कावेरी कॉलोनी, महाबली नगर, सिग्नेचर, फाइन इन्क्लेव सहित दो दर्जन से अधिक आवासीय क्षेत्रों के साथ झुग्गी बस्तियां भी शामिल हैं। क्षेत्र की विविधता यह दर्शाती है कि यहां विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लोग निवास करते हैं।
हालांकि कई स्थानों पर सड़क और नाली निर्माण कार्य हुए हैं, लेकिन अनेक क्षेत्रों में अभी भी अधूरी सुविधाओं और रखरखाव की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पानी की आपूर्ति अब भी बड़ी चुनौती
गणपति इन्क्लेव और आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों का कहना है कि जिन घरों में निजी बोरवेल नहीं हैं, उन्हें नगर निगम की जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। कई क्षेत्रों में नलों में सीमित समय के लिए पानी आता है, जिससे दैनिक जरूरतें पूरी करना कठिन हो जाता है।
कांग्रेस के पूर्व पार्षद गायत्री प्रसाद शर्मा का दावा है कि वार्ड में अब भी बड़ी संख्या में घरों और मल्टीस्टोरी आवासीय परिसरों तक नियमित नल कनेक्शन नहीं पहुंचे हैं। उनके अनुसार कई कॉलोनियों में जलापूर्ति नेटवर्क का विस्तार अधूरा है।
सफाई व्यवस्था को लेकर बढ़ रही नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई कॉलोनियों में नियमित झाड़ू नहीं लगाई जाती और खाली प्लॉटों तथा सड़कों के किनारे कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। इससे न केवल क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित होती है बल्कि बरसात के मौसम में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
मंदाकिनी कॉलोनी के निवासी अंकित लोधी का कहना है कि कॉलोनी में नियमित सफाई नहीं होने के कारण रहवासियों को अपने घरों के सामने स्वयं सफाई करनी पड़ती है। वहीं बारिश का पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
सीवेज और जलनिकासी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह
कई कॉलोनियों में सीवेज लाइन जाम होने की शिकायतें सामने आई हैं। रहवासियों का कहना है कि समस्या होने पर उन्हें निजी खर्च पर सफाई करानी पड़ती है। कुछ स्थानों पर नालियों और सीवेज नेटवर्क के बीच तकनीकी समन्वय की कमी भी बताई जा रही है, जिसके कारण जल निकासी प्रभावित होती है।
विशेष चिंता का विषय यह है कि मानसून से पहले बड़े नालों की व्यापक सफाई नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। यदि भारी बारिश होती है तो दामखेड़ा, सर्वधर्म क्षेत्र और अन्य निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
बंद स्ट्रीट लाइटों से सुरक्षा चिंता
गणपति इन्क्लेव के निवासी योगेश सिंह के अनुसार कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद हैं। शाम और रात के समय अंधेरा रहने से महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी होती है।
इसी तरह स्थानीय व्यवसायी गोपाल रजक का कहना है कि क्षेत्र की कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और स्ट्रीट लाइट बंद रहने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश में डूबती सड़कें, व्यापारियों को नुकसान
सुभाष मार्केट के व्यापारी दीपक रामचंदानी ने बताया कि क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाता है। उनके अनुसार पिछले वर्ष दुकान में पानी घुसने से आर्थिक नुकसान हुआ था और इस वर्ष भी स्थिति में विशेष सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बरसाती पानी दुकानों तक पहुंच जाता है।
पार्षद ने गिनाए विकास कार्य
वार्ड की भाजपा पार्षद ज्योति मिश्रा का कहना है कि उनके कार्यकाल में सड़कों का निर्माण, पार्कों का विकास, सौंदर्यीकरण और स्ट्रीट लाइट लगाने सहित कई विकास कार्य किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अमृत योजना के तहत सीवेज संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए भी कार्य प्रारंभ कराया गया है तथा बारिश से पहले नालों की सफाई की नियमित निगरानी की जा रही है।
उनके अनुसार यदि किसी क्षेत्र में अभी भी समस्याएं शेष हैं तो उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा।
मानसून से पहले प्रशासन के सामने चुनौती
वार्ड 82 की स्थिति यह संकेत देती है कि केवल विकास कार्यों की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनका नियमित रखरखाव और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कोलार रोड का यह क्षेत्र तेजी से आबाद हो रहा है, ऐसे में जलापूर्ति, सीवेज, स्वच्छता और सड़क सुरक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को मजबूत करना स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
यदि मानसून से पहले नालों की सफाई, स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और कचरा प्रबंधन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले महीनों में नागरिकों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।







